किसानों को सुरक्षित खेती के लिए किया गया जागरूक
चंदौली। किसान कल्याण केंद्र के सभागार में मंगलवार को ग्रो सेफ फूड अभियान 2.0 के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नकली, प्रतिबंधित और असुरक्षित कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचाना तथा सुरक्षित एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करना था।
कार्यशाला की शुरुआत कीटनाशी विक्रेताओं, स्थानीय किसानों और कृषि विभाग के तकनीकी सहायकों के पंजीकरण के साथ हुई।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि कीटनाशकों के असुरक्षित और अनियमित प्रयोग से मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों, विक्रेताओं और आमजन से जैविक एवं सुरक्षित कृषि रसायनों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने सुरक्षित अन्न उत्पादन और एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को कीटनाशकों के छिड़काव के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सावधानियों के बारे में भी विस्तार से बताया।
ग्रीन लैंड कंपनी, मुजफ्फरनगर के प्रतिनिधि दिनेश कुमार ने धान की फसल में आईपीएम तकनीक के उपयोग पर प्रकाश डाला। वहीं मुकेश गंगवार ने सुरक्षित रसायनों के प्रयोग पर किसानों के साथ संवाद कर उनकी शंकाओं का समाधान किया।
वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप-ए) रमेश सिंह यादव ने अमानक कृषि उत्पादों की पहचान, कीटनाशकों के लेबल और निर्देश पुस्तिका (लीफलेट) पढ़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी कीटनाशी विक्रेता कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं कीटनाशी नियम-1971 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए ही व्यापार करें।
कार्यक्रम में कृषि रक्षा विभाग के प्राविधिक सहायकों के अलावा प्रगतिशील किसान मुन्ना सिंह, शैलेन्द्र पांडेय, तेज बहादुर यादव सहित बड़ी संख्या में किसान और कृषि व्यवसायी मौजूद रहे।








