मॉडलों और जनस्वास्थ्य पर परमाणु खतरा
नदी में बड़ी संख्या में मरे हुए मछली पकड़ने वालों से मिलने से लेकर अवशेषों में पानी की जांच और सबूतों पर कार्रवाई की मांग
महराजगंज। सोहगीबरवा क्षेत्र के तीन वन क्षेत्र के बीच से बहती रोहिणी के चानकी घाट क्षेत्र में नदी के किनारे से कथित तौर पर साओहगी में अवैध तरीके से मछली मारने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मछली माफियाओं ने नदी में जहर डाला, जिससे बड़ी संख्या में मछलियाँ पानी की सतह पर तैरने लगीं। इससे नदी का पानी सुपरमार्केट और आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध से जनस्वास्थ्य और रसायनों पर खतरा पैदा हो गया है।
पुनर्मूल्यांकन के अनुसार कई दिनों से नदी तट पर बड़ी संख्या में मृत मछलियाँ पड़ी हुई हैं। पानी से उठना तेज दुर्गन्ध के कारण आसपास के लोगों के लिए पानी से उठना भी मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही मृत मछलियों का वैज्ञानिक तरीके से वैज्ञानिक तरीके से और नदी के पानी की जांच नहीं की गई तो संक्रामक बैक्टीरिया का खतरा बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि गर्मी के मौसम में सोहगीबरवा वन क्षेत्र के हिरन, नीलगाय, जंगली सुअर सहित कई उदाहरण मिलते हैं जैसे नदी का पानी पीना। ऐसे में अगर पानी साज़िश हुआ तो पत्थरों के जीवन पर भी गंभीर संकट पैदा हो सकता है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएँ, जैव विविधता और प्राकृतिक शैलियाँ तंत्र के लिए भी गंभीर खतरा हैं।
उत्तर का आरोप है कि नदी में ज़हरीली मछली पकड़ने की घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, इसलिए लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने प्रशासन से नदी के पानी के खिलाफ़ गुप्त जांच की खोज की, मृत प्राणियों को हतोत्साहित किया, पूरे मामले की जांच पड़ताल की और फ़ास्ट केस की कड़ी में कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
इस संबंध में प्रादेशिक वन अधिशाषी निरंजन सुर्वे ने बताया कि मामला उनके घर में नहीं था। शिकायत मिलने के बाद जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।







