प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही मिलने पर एसडीएम ने की कार्रवाई, तहसीलदार को सौंपी विस्तृत जांच
महराजगंज, 26 जून। निचलौल तहसील में तैनात लेखपाल मनीष पटेल को एक ग्रामीण से एक लाख रुपये रिश्वत लेने, तहसील परिसर में मारपीट करने तथा जातिसूचक गालियां देने के आरोप में उपजिलाधिकारी निचलौल सिद्धार्थ गुप्ता ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
क्या है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निचलौल तहसील क्षेत्र के ग्राम करमहिया निवासी जीयन प्रसाद ने उच्चाधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि कुछ दिन पूर्व स्थानीय पुलिस ने उनके मिट्टी लदे वाहन और एक जेसीबी मशीन को पकड़ लिया था। वाहन छुड़ाने के प्रयास के दौरान लेखपाल मनीष पटेल ने उनसे संपर्क कर पुलिस से समन्वय स्थापित कर वाहन छुड़वाने का आश्वासन दिया और इसके एवज में एक लाख रुपये की मांग की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मजबूरीवश उन्होंने एक लाख रुपये की व्यवस्था कर लेखपाल को दे दिए, जिसके बाद कथित रूप से रात में हस्तक्षेप कर वाहन छोड़वा दिए गए।
पैसे वापस मांगने पर मारपीट और धमकी का आरोप
जीयन प्रसाद के अनुसार, बाद में जब उन्हें एहसास हुआ कि उनसे अवैध रूप से धन लिया गया है, तो उन्होंने लेखपाल से रुपये वापस मांगे। आरोप है कि इस पर लेखपाल भड़क गए और तहसील परिसर में उनके साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि लेखपाल ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया और दोबारा पैसे मांगने या शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी।
जांच में मिली प्रथम दृष्टया पुष्टि
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सिद्धार्थ गुप्ता ने प्रारंभिक जांच नायब तहसीलदार को सौंपी। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में लेखपाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई तथा प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोपों में सत्यता प्रतीत होने की बात सामने आई।
तहसीलदार करेंगे विस्तृत जांच
जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद एसडीएम ने सरकारी पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और कर्मचारी आचरण नियमावली के उल्लंघन के आरोप में लेखपाल मनीष पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की विस्तृत विभागीय जांच के लिए तहसीलदार को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई को आमजन के बीच भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।







