श्रावस्ती। जिले में पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए चलाया जा रहा एफएफडी टीकाकरण अभियान रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। 22 जुलाई से शुरू हुए अभियान के तहत जिले में 2,01,400 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक करीब 13 प्रतिशत पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है। अभियान की धीमी गति ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है।
अभियान की रफ्तार धीमी होने की बड़ी वजह कर्मचारियों की कमी बताई जा रही है। जिले के 13 पशु चिकित्सालयों के सापेक्ष महज 11 पशु चिकित्सक तैनात हैं, जबकि फार्मासिस्ट के 13 पदों में सिर्फ एक पद पर तैनाती है। इसके अलावा 130 पैरावेटों में केवल करीब 40 ही सक्रिय बताए जा रहे हैं। करीब एक महीने से पैरावेटों की हड़ताल के कारण भी टीकाकरण अभियान प्रभावित होने की बात सामने आई है।
जिले के हरदत्तनगर गिरंट स्थित पशु चिकित्सालय में ताला लटका मिलने और परिसर में बदहाली के हालात की जानकारी भी सामने आई है। वहीं गिलौला पशु चिकित्सालय में चिकित्सक मौजूद मिले, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण टीकाकरण की गति प्रभावित होने की बात कही गई। यहां 42 हजार पशुओं के लक्ष्य के मुकाबले एक सप्ताह में करीब चार हजार पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है। ऐसी स्थिति में तय समय के भीतर लक्ष्य पूरा करना विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
पशुपालकों का कहना है कि पशुओं को समय पर टीका नहीं लगने से बीमारी का खतरा बढ़ सकता है और इसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ सकता है। ऐसे में अभियान को गति देने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता और जमीनी स्तर पर निगरानी जरूरी है। अब देखना होगा कि विभाग कर्मचारियों की कमी और पैरावेटों की हड़ताल के बीच टीकाकरण अभियान को कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाता है और तय लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।






















