अवध विहारी कुंज में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त भगवान श्रीराम की भक्ति में सराबोर नजर आए। कथा वाचक एवं अवध विहारी कुंज के महंत गणेश दास जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र के साथ माता सीता और श्रीराम के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। महंत गणेश दास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सत्य और संस्कारों का संदेश देता है। श्रीराम और माता सीता का विवाह भारतीय संस्कृति में आदर्श दांपत्य, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक संस्कारों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान भगवान श्रीराम के मिथिला पहुंचने, राजा जनक के दरबार में आयोजित धनुष यज्ञ और माता सीता के स्वयंवर का प्रसंग सुनाया गया। जैसे ही भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करने और माता सीता द्वारा उन्हें वरमाला पहनाने का प्रसंग आया, कथा पंडाल ‘जय श्रीराम’ और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ इस प्रसंग का आनंद लिया। महंत गणेश दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रामकथा समाज में प्रेम, भाईचारा, सेवा, संयम और संस्कारों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भगवान श्रीराम के जीवन से हमें सत्य के मार्ग पर चलने और कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने की प्रेरणा मिलती है।
कथा के समापन पर भगवान श्रीराम और माता सीता की विधिवत आरती की गई। बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर सुख-शांति और लोककल्याण की कामना की। कथा के बाद भी अवध विहारी कुंज परिसर में काफी देर तक भक्तिमय माहौल बना रहा।






















