नोएडा में स्लीपर बस के भीतर नाबालिग से दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इसका असर अब कानपुर में भी दिखाई दे रहा है। कानपुर पुलिस ने स्लीपर और लंबी दूरी की बसों की निगरानी बढ़ाते हुए ‘ऑपरेशन अलर्ट’ शुरू किया है। अभियान के तहत शहर में ऐसी बसों की लगातार जांच की जा रही है। इस बार पुलिस का ध्यान केवल बस के परमिट, फिटनेस और दूसरे दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं है। बस के अंदर यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। खासतौर पर स्लीपर बसों में लगे पर्दों और ऐसे इंतजामों पर नजर है, जिनकी वजह से बस के अंदर का हिस्सा बाहर से पूरी तरह दिखाई नहीं देता।
स्लीपर बसों के पर्दे भी पुलिस की निगरानी में
जॉइंट पुलिस कमिश्नर विपिन ताडा के मुताबिक, स्लीपर बसों में यात्रियों को अलग केबिन जैसा अनुभव देने के लिए लगाए गए पर्दे कई बार सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं। पुलिस अब यह जांच रही है कि कहीं नियमों को दरकिनार कर ऐसे पर्दे या अन्य इंतजाम तो नहीं किए गए हैं, जिनसे बस के भीतर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाए। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर्दे या किसी अन्य आड़ में छिपी न रह सके। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित बस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
चालक और परिचालक का होगा पुलिस वेरिफिकेशन
ऑपरेशन अलर्ट के तहत बस ड्राइवर और कंडक्टर भी पुलिस की जांच के दायरे में रहेंगे। पुलिस उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करने के साथ ही उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटाएगी। अगर किसी चालक या परिचालक के खिलाफ पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं या सत्यापन के दौरान कोई गंभीर जानकारी सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यानी बस में यात्रियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की पृष्ठभूमि को भी अब गंभीरता से जांचा जाएगा।
बस के अंदर जाकर होगी जांच
चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी बस के भीतर जाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। स्लीपर सीटों के बीच लगाए गए पर्दों से लेकर ब्लैक फिल्म तक की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं बस के अंदर ऐसा कोई हिस्सा तो नहीं बनाया गया है, जहां बाहरी निगरानी लगभग खत्म हो जाती हो। अनधिकृत तरीके से लगाए गए पर्दे या नियमों के विपरीत ब्लैक फिल्म मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
बस संचालकों को भी दिए जा रहे निर्देश
पुलिस ने बस ऑपरेटरों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के साथ भी समन्वय शुरू किया है। बस ऑपरेटर यूनियन, कैब ऑपरेटर यूनियन और स्थानीय बस संचालकों के प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बातचीत की जा रही है। बस मालिकों और संचालकों से कहा जा रहा है कि ड्राइवर और कंडक्टर को काम पर रखने से पहले उनका पुलिस सत्यापन कराया जाए। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
खुफिया तंत्र भी जुटाएगा जानकारी
इस अभियान में स्थानीय पुलिस के साथ खुफिया तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। परिवहन व्यवस्था से जुड़े लोगों और बस कर्मचारियों के बारे में जरूरी जानकारी जुटाकर उसका सत्यापन कराया जाएगा। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने या मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है। नोएडा की घटना के बाद शुरू किए गए इस अभियान से कानपुर पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि लंबी दूरी की बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस की निगरानी बस के बाहर ही नहीं, बल्कि अंदर तक रहेगी, ताकि सफर के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।






















