नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इससे बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार चुनने का अधिकार जनता के पास होना चाहिए, लेकिन यदि यह तय किया जाने लगे कि कौन मतदान कर सकता है और कौन नहीं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर भी आपत्ति जताई। एक मामले में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की गई, जबकि मतदाता डेटाबेस और चुनावी सॉफ्टवेयर तक स्थानीय अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए गए।
चुनाव आयोग ने कहा- SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
वहीं, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए हैं। आयोग के मुताबिक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग स्तर पर राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, SIR का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार होने के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्राफ्ट मतदाता रिकॉर्ड से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ मामलों में हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल कराने के लिए अपील की प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे मामले ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, नाम जोड़ने और हटाने के अधिकार तथा चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।





















