म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस:NIA कोर्ट ने दी जमानत
नई दिल्ली। म्यांमार में कथित तौर पर हथियार और ड्रोन प्रशिक्षण देने के मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने अपने-अपने देश जाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने सभी सात आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिलने के बाद पासपोर्ट जारी करने और सीमित अवधि के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दी। वैनडाइक को गुरुवार रात तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया।
अदालत के आदेश के अनुसार वैनडाइक को अमेरिका और छह यूक्रेनी नागरिकों को यूक्रेन जाने की अनुमति दी गई है। उन्हें निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा और जांच में आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के समक्ष उपस्थित होना होगा। अदालत ने विदेश जाने वाले आरोपियों को एक महीने बाद भारत लौटकर अदालत को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है।
मार्च में हुई थी सातों की गिरफ्तारी
NIA ने मार्च 2026 में सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक के अलावा यूक्रेन के पेट्रो हुर्बा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिन्स्की शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वैनडाइक को कोलकाता हवाईअड्डे से जबकि यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ के हवाईअड्डों से गिरफ्तार किया गया था।
NIA का आरोप रहा है कि ये लोग म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को हथियारों और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने से जुड़े थे। जांच एजेंसी ने अदालत में यह भी दावा किया था कि सातों का संबंध म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले से हो सकता है। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिन पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
चार्जशीट को लेकर अदालत में क्या हुआ?
मामले में NIA ने शुरुआती जांच के दौरान UAPA की धाराएं लगाई थीं। हालांकि बाद में दाखिल चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं थीं और आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत अपराधों का उल्लेख किया गया। अदालत ने माना कि UAPA से संबंधित जांच अभी जारी है और जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट को इस स्तर पर अधूरा माना गया।
इसी आधार पर 18 सितंबर को वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दी गई थी। इसके बाद 24 सितंबर को छह यूक्रेनी नागरिकों को भी इसी आधार पर जमानत मिली। अदालत के अनुसार, जांच पूरी करने की वैधानिक अवधि में संबंधित आरोपों की पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार बनता है।
इमिग्रेशन मामलों में भी मिली राहत
छह यूक्रेनी नागरिकों के संबंध में इमिग्रेशन और वीजा उल्लंघन से जुड़े मामलों को भी FRRO स्तर पर निपटाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इन मामलों में प्रत्येक आरोपी ने 5.5 लाख रुपये की कंपाउंडिंग राशि जमा की, जिसके बाद अदालत ने संबंधित इमिग्रेशन अपराधों से उन्हें डिस्चार्ज किया।
वैनडाइक ने भी इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए 5.5 लाख रुपये की राशि जमा की थी। इसके बाद उनके वकीलों की ओर से अदालत में आगे की कानूनी राहत के लिए कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
कांग्रेस ने सरकार से पूछे सवाल
अदालत के इस आदेश के बाद कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि अमेरिकी नागरिक को मिली राहत के पीछे अमेरिकी दबाव की भूमिका हो सकती है। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि इन विदेशी नागरिकों को भारत का वीजा कैसे मिला और वे भारत के रास्ते म्यांमार तक कैसे पहुंचे।
सरकार की ओर से इन राजनीतिक आरोपों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अदालत के आदेश और मामले की जांच की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है। फिलहाल NIA की जांच जारी है और अदालत द्वारा दी गई डिफॉल्ट जमानत को मामले में आरोपों से अंतिम रूप से बरी होना नहीं माना जा सकता।
NIA ने अदालत में कहा है कि जांच के कुछ हिस्से अभी जारी हैं और आवश्यकता पड़ने पर आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जा सकता है।





















