यूपी समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें वजह
नई दिल्ली। देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू होने के बावजूद बारिश का दौर पूरी तरह थमा नहीं है। बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत से जुड़े मौसमी सिस्टम के प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में फिर बारिश तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 और 27 सितंबर को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
मौसम में अचानक आए इस बदलाव की बड़ी वजह मध्य भारत से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा मौसम तंत्र है। IMD के अनुसार 25 सितंबर को उत्तर छत्तीसगढ़ के ऊपर बना डिप्रेशन उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा था और इसके दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद इसके कमजोर होकर अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने का अनुमान था।
यूपी में आज अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी
उत्तर प्रदेश इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। IMD ने 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों के लिए अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके साथ गरज-चमक और आंधी जैसी मौसमी गतिविधियों की भी आशंका है।
27 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। हालांकि 28 सितंबर के बाद फिलहाल इन दोनों क्षेत्रों के लिए कोई चेतावनी नहीं है।
इसका मतलब है कि अगले 24 से 48 घंटे यूपी के लिए महत्वपूर्ण हैं। तेज बारिश वाले इलाकों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
उत्तराखंड में भी बेहद खराब रह सकता है मौसम
उत्तराखंड में भी 26 और 27 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 28 सितंबर को भी भारी बारिश का अलर्ट है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में भी बारिश का दौर
दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी मानसून की विदाई के बाद बारिश लौट आई है। IMD के 26 सितंबर के पूर्वानुमान में हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के लिए 26 और 27 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक की चेतावनी दी गई है। इसके बाद 28 सितंबर से फिलहाल कोई चेतावनी नहीं है।
दिल्ली से मानसून की आधिकारिक वापसी 23 सितंबर को दर्ज की गई थी। इसके बावजूद बाद के मौसमी सिस्टम के प्रभाव से बारिश की स्थिति बन सकती है। IMD के अनुसार मानसून की वापसी केवल तारीख के आधार पर तय नहीं होती, बल्कि बारिश में लगातार कमी, निचले स्तर पर प्रतिचक्रवात और वातावरण में नमी घटने जैसे कई संकेतों को देखा जाता है।
मानसून लौटते समय बारिश क्यों बढ़ जाती है?
मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि देश के हर हिस्से में तुरंत बारिश बंद हो जाती है। मानसून की वापसी चरणबद्ध तरीके से होती है। इस दौरान बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र या डिप्रेशन उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे सिस्टम अपने रास्ते में मध्य भारत और उत्तर प्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों में बारिश करा सकते हैं।
मौजूदा स्थिति में उत्तर छत्तीसगढ़ से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ता डिप्रेशन इसका प्रमुख कारण है। IMD के अनुसार यह सिस्टम उत्तर छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश से होकर दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा था।
मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों पर भी असर
मध्य भारत इस मौसम प्रणाली के रास्ते में है, इसलिए मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। सिस्टम के कमजोर होने के साथ बारिश का वितरण भी धीरे-धीरे बदलने की संभावना रहती है।
मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि उत्तर भारत में बारिश का यह सक्रिय दौर बहुत लंबा नहीं चल सकता। यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर में 28 सितंबर के बाद फिलहाल भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं दी गई है।
देश में मानसून की स्थिति क्या है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी सितंबर के दौरान धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। IMD के मुताबिक मानसून की पूरी वापसी केवल उत्तर भारत से विदाई के साथ समाप्त नहीं मानी जाती। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधि, नमी और हवाओं के पैटर्न में बदलाव जैसे संकेतों को देखा जाता है।
इसलिए सितंबर के आखिरी दिनों में मानसून की विदाई और अचानक बारिश—दोनों स्थितियां एक साथ दिखाई दे सकती हैं। मौजूदा मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के साथ उत्तर भारत में बारिश की तीव्रता कम होने की उम्मीद है।




















