लखनऊ। मिलावट अब सिर्फ मसाले की डिब्बी तक सीमित समस्या नहीं रह गई है। खेत से मंडी, कारखाने से दुकान और फिर हमारी रसोई तक पहुंचने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं। सस्ता विकल्प मिलाकर अधिक मुनाफा कमाने का खेल कई खाद्य पदार्थों तक पहुंच चुका है। आटा, चावल, दाल, बेसन, मसाले, तेल, दूध और मिठाइयां हमारी रोजमर्रा की जरूरत हैं, इसलिए इनके साथ होने वाली किसी भी तरह की मिलावट सीधे लोगों की सेहत से जुड़ जाती है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट की जांच के लिए मानक और परीक्षण प्रक्रियाएं तय कर रखी हैं।
दाल, बेसन और मसालों जैसी पिसी या प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री में मिलावट की पहचान कई बार आसान नहीं होती। काली मिर्च, हल्दी, हींग और दूसरे मसालों की जांच के लिए भी निर्धारित परीक्षण विधियां मौजूद हैं। दूध और उससे बने उत्पादों को लेकर भी सावधानी जरूरी है। दूध में पानी समेत कई अवांछित पदार्थों की जांच की व्यवस्था है, जबकि पनीर, खोया, घी, मक्खन और मिठाइयों के लिए भी अलग खाद्य सुरक्षा मानक लागू हैं। यही वजह है कि केवल रंग, खुशबू या दिखावट देखकर किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह शुद्ध मान लेना हमेशा सही नहीं होता।
खाद्य तेल भी इस चिंता का अहम हिस्सा है। तेल में मिलावट की जांच के साथ-साथ बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल को लेकर भी खाद्य सुरक्षा नियमों में सावधानी बरतने की बात कही गई है। एक ही तेल को लगातार गर्म करने से उसमें रासायनिक बदलाव हो सकते हैं। दूसरी ओर नमक, चीनी, गुड़, शहद, चाय, कॉफी, फल और सब्जियां भी खाद्य सुरक्षा निगरानी के दायरे में आती हैं। हालांकि यह समझना भी जरूरी है कि हर रसायन या खाद्य योजक मिलावट नहीं होता। कुछ पदार्थ निर्धारित मात्रा और निर्धारित उपयोग के तहत वैध होते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल हो, निर्धारित सीमा का उल्लंघन किया जाए या खाद्य सामग्री के बारे में उपभोक्ता को गुमराह किया जाए।
सबसे बड़ी जिम्मेदारी आखिरकार जागरूक उपभोक्ता की भी है। पैकेट पर लिखा ब्रांड अपने आप में शुद्धता की गारंटी नहीं माना जा सकता। खरीदारी करते समय सामग्री-सूची, पैकिंग, तारीख और आवश्यक नियामकीय जानकारी देखना जरूरी है। खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए और संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर संबंधित विभाग को शिकायत या जांच के लिए जानकारी देनी चाहिए। मिलावट सिर्फ खाने में घटिया चीज मिलाने का मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ता के भरोसे के साथ खिलवाड़ भी है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि ‘चलता है’ वाली सोच से बाहर निकलकर हम अपनी थाली में आने वाली हर जरूरी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सजग रहें।
लेखक — डॉ. दीपक गोस्वामी
मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक एवं सामाजिक मनोविज्ञान विश्लेषक
समन्वयक — आदर्श संस्कार शाला, भारत





















