अयोध्या। सर्किट हाउस सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने और जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। महापौर ने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की आलोचना का अधिकार है, लेकिन आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।
एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के सवालों पर महापौर ने निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयोग के अनुसार, एसआईआर से जुड़े प्रमुख निर्णय उसकी सहमति से लिए गए हैं। कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र के विवाद पर उन्होंने कहा कि आयोग ने इसे प्रशासनिक विषय बताया है। वहीं, फॉर्म-6 को लेकर उन्होंने दावा किया कि गैर-एसआईआर अवधि में पहले से निर्धारित नियम ही लागू हैं और प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
महापौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए ईवीएम, निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों का जिक्र किया। उन्होंने राफेल सौदे, बालाकोट एयर स्ट्राइक और तवांग झड़प से जुड़े राजनीतिक बयानों पर भी अपनी बात रखी। महापौर ने कहा कि राजनीतिक आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर रखा जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ चर्चा करने की बात कही।
इस दौरान जिला पंचायत प्रशासक रोली सिंह ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और एसआईआर जैसे विषयों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आधिकारिक तथ्यों को जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाताओं की भागीदारी और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। रोली सिंह के मुताबिक, राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए।





















