यूपी कांग्रेस में बड़ा बदलाव: जानिए पूरी कहानी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को नई जिम्मेदारी सौंपी है। सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल को सपा के साथ गठबंधन और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, यह कहना कि अजय राय को केवल सपा-कांग्रेस गठबंधन में कथित बाधा के कारण हटाया गया, पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में संगठन के भीतर मतभेद और गठबंधन को लेकर अलग-अलग रुख का भी उल्लेख किया गया है।
गठबंधन को लेकर अजय राय का रुख
अजय राय अगस्त 2023 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। इस दौरान लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे समेत कई मुद्दों पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बातचीत हुई। जुलाई 2026 में अजय राय और प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कांग्रेस और सपा का गठबंधन कायम है और दोनों दल 2027 का चुनाव मिलकर लड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इसके बावजूद हाल के महीनों में कांग्रेस के भीतर संगठन और सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग विचार सामने आते रहे। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि अजय राय गठबंधन के मुद्दे पर अपेक्षाकृत सख्त रुख रखते थे। वहीं कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ उनके मतभेद की भी चर्चा रही।
नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन
आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ कांग्रेस ने संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाने की कोशिश की है। प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले सहारनपुर सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषणों में इस बदलाव को कांग्रेस के सामाजिक आधार को व्यापक करने और सपा के साथ तालमेल के लिए संगठन को नए सिरे से तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नए संगठन में ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की चर्चा है।
अब आगे क्या?
आराधना मिश्रा के सामने प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में लाने की चुनौती होगी। वहीं कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत भी महत्वपूर्ण होगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पहले ही विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। ऐसे में गठबंधन की बातचीत में दोनों दलों की सीटों को लेकर स्थिति अहम मुद्दा बन सकती है।
अजय राय को हटाए जाने के पीछे संगठनात्मक कारणों के साथ-साथ गठबंधन और सामाजिक समीकरणों की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन अंतिम तौर पर कांग्रेस नेतृत्व ने उनके स्थान पर आराधना मिश्रा को क्यों चुना, इसका विस्तृत आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।



















