राजस्थान से पहुंचे 300 श्रद्धालुओं ने जगाई सनातन आस्था की अलख
सीताराज महल में भव्य त्रिनेत्र गणेश महोत्सव सम्पन्न, संतों और श्रद्धालुओं ने लिया सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या स्थित सीताराज महल में महंत श्याम बिहारी दास महाराज के सानिध्य में आयोजित त्रिनेत्र गणेश महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का भव्य संगम बन गया। चार दिवसीय धार्मिक यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में राजस्थान के सवाई माधोपुर (रणथंभौर) सहित देश के विभिन्न राज्यों से करीब 300 श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ के संत सरवन दास तथा श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर आपूर्ति करने वाले उद्योगपति नेमीचंद शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
राजस्थान से आए अशोक कुमार खुन्टेता ने बताया कि रणथंभौर दुर्ग स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर विश्व का एकमात्र स्वयंभू मंदिर है, जहां भगवान गणेश त्रिनेत्र स्वरूप में विराजमान हैं। अरावली पर्वतमालाओं और रणथंभौर टाइगर रिजर्व के मध्य स्थित यह प्राचीन मंदिर देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलित होती है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक यात्रा के प्रथम चरण में श्रद्धालुओं ने बरसाना पहुंचकर श्रीराधा रानी के दर्शन किए। इसके बाद सभी काशी पहुंचे, जहां 3 और 4 जुलाई को त्रिनेत्र गणेश का भव्य दरबार सजाया गया। 4 जुलाई को भगवान त्रिनेत्र गणेश की विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें भजन-कीर्तन, प्रवचन और धार्मिक व्याख्यानों के माध्यम से भगवान गणेश की महिमा का गुणगान किया गया। यात्रा का समापन अयोध्या स्थित सीताराज महल में भव्य महोत्सव के साथ हुआ।
अशोक कुमार खुन्टेता ने कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और प्रथम पूज्य देव हैं। उनकी कृपा से भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि, यश, कीर्ति, ऋद्धि-सिद्धि तथा शुभ-लाभ की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जहां भगवान गणपति का स्मरण होता है, वहां सभी विघ्न स्वतः दूर हो जाते हैं और जीवन में मंगल का मार्ग प्रशस्त होता है।
महंत श्याम बिहारी दास महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में संतों एवं श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की आराधना करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक परंपराओं के संवर्धन और सामाजिक एकता का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में त्रिनेत्र गणेश के जयघोष के साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का संदेश दिया।








