अमृत उजाला
Thursday, Jul 9, 2026 06:33
Sign In
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
        • लखनऊ
        • आगरा
        • कानपुर
        • अलीगढ
        • वाराणसी
        • मथुरा
        • प्रयागराज
        • मेरठ
        • गोरखपुर
        • बरेली
        • नोएडा
        • अयोध्या
        • गाजियाबाद
        • मुरादाबाद
        • View All Cities
          • आगरा
          • अलीगढ
          • अम्बेडकर नगर
          • अमेठी
          • अमरोहा
          • औरैया
          • अयोध्या
          • आज़मगढ़
          • बागपत
          • बहराइच
          • बलिया
          • बलरामपुर
          • बांदा
          • बाराबंकी
          • बरेली
          • बस्ती
          • भदोही
          • बिजनौर
          • बदायूं
          • बुलंदशहर
          • चंदौली
          • चित्रकूट
          • देवरिया
          • एटा
          • इटावा
          • फर्रुखाबाद
          • फतेहपुर
          • फिरोजाबाद
          • गाजियाबाद
          • ग़ाज़ीपुर
          • गोंडा
          • गोरखपुर
          • हमीरपुर
          • हापुड़
          • हरदोई
          • हाथरस
          • जालौन
          • जौनपुर
          • झांसी
          • कन्नौज
          • कानपुर
          • कासगंज
          • कौशाम्बी
          • खेरी
          • कुशीनगर
          • ललितपुर
          • लखनऊ
          • महाराजगंज
          • महोबा
          • मैनपुरी
          • मथुरा
          • मऊ
          • मेरठ
          • मिर्जापुर
          • मुरादाबाद
          • मुज़फ्फरनगर
          • नोएडा
          • पीलीभीत
          • प्रतापगढ़
          • प्रयागराज
          • रायबरेली
          • रामपुर
          • सहारनपुर
          • सम्भल
          • संत कबीर नगर
          • शाहजहांपुर
          • शामली
          • श्रावस्ती
          • सिद्धार्थनगर
          • सीतापुर
          • सोनभद्र
          • सुल्तानपुर
          • उन्नाव
          • वाराणसी
        • Hide All Cities
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Notification
Font ResizerAa
Advertisement
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • वाराणसी
    • प्रयागराज
    • गोरखपुर
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • आगरा
    • अलीगढ
    • मथुरा
    • मेरठ
    • बरेली
    • अयोध्या
    • मुरादाबाद
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • स्पॉटलाइट
  • राजनीति
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मौसम
  • टेक्नोलॉजी
अमृत उजाला
Thursday, Jul 9, 2026 06:33
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
    • लखनऊ
    • कानपुर
    • वाराणसी
    • प्रयागराज
    • गोरखपुर
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • आगरा
    • अलीगढ
    • मथुरा
    • मेरठ
    • बरेली
    • अयोध्या
    • मुरादाबाद
    • आज़मगढ़
    • अम्बेडकर नगर
    • अमेठी
    • अमरोहा
    • औरैया
    • बागपत
    • बहराइच
    • बलिया
    • बलरामपुर
    • बांदा
    • बाराबंकी
    • बस्ती
    • भदोही
    • बिजनौर
    • बदायूं
    • बुलंदशहर
    • चंदौली
    • चित्रकूट
    • देवरिया
    • एटा
    • इटावा
    • फर्रुखाबाद
    • फतेहपुर
    • फिरोजाबाद
    • गौतम बुद्ध नगर
    • ग़ाज़ीपुर
    • गोंडा
    • हमीरपुर
    • हापुड़
    • हरदोई
    • हाथरस
    • जालौन
    • जौनपुर
    • झांसी
    • कन्नौज
    • कासगंज
    • कौशाम्बी
    • खेरी
    • कुशीनगर
    • ललितपुर
    • महाराजगंज
    • महोबा
    • मैनपुरी
    • मऊ
    • मिर्जापुर
    • मुज़फ्फरनगर
    • पीलीभीत
    • प्रतापगढ़
    • रायबरेली
    • रामपुर
    • सहारनपुर
    • सम्भल
    • संत कबीर नगर
    • शाहजहांपुर
    • शामली
    • श्रावस्ती
    • सिद्धार्थनगर
    • सीतापुर
    • सोनभद्र
    • सुल्तानपुर
    • उन्नाव
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Search
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
        • लखनऊ
        • आगरा
        • कानपुर
        • अलीगढ
        • वाराणसी
        • मथुरा
        • प्रयागराज
        • मेरठ
        • गोरखपुर
        • बरेली
        • नोएडा
        • अयोध्या
        • गाजियाबाद
        • मुरादाबाद
        • View All Cities
          • आगरा
          • अलीगढ
          • अम्बेडकर नगर
          • अमेठी
          • अमरोहा
          • औरैया
          • अयोध्या
          • आज़मगढ़
          • बागपत
          • बहराइच
          • बलिया
          • बलरामपुर
          • बांदा
          • बाराबंकी
          • बरेली
          • बस्ती
          • भदोही
          • बिजनौर
          • बदायूं
          • बुलंदशहर
          • चंदौली
          • चित्रकूट
          • देवरिया
          • एटा
          • इटावा
          • फर्रुखाबाद
          • फतेहपुर
          • फिरोजाबाद
          • गाजियाबाद
          • ग़ाज़ीपुर
          • गोंडा
          • गोरखपुर
          • हमीरपुर
          • हापुड़
          • हरदोई
          • हाथरस
          • जालौन
          • जौनपुर
          • झांसी
          • कन्नौज
          • कानपुर
          • कासगंज
          • कौशाम्बी
          • खेरी
          • कुशीनगर
          • ललितपुर
          • लखनऊ
          • महाराजगंज
          • महोबा
          • मैनपुरी
          • मथुरा
          • मऊ
          • मेरठ
          • मिर्जापुर
          • मुरादाबाद
          • मुज़फ्फरनगर
          • नोएडा
          • पीलीभीत
          • प्रतापगढ़
          • प्रयागराज
          • रायबरेली
          • रामपुर
          • सहारनपुर
          • सम्भल
          • संत कबीर नगर
          • शाहजहांपुर
          • शामली
          • श्रावस्ती
          • सिद्धार्थनगर
          • सीतापुर
          • सोनभद्र
          • सुल्तानपुर
          • उन्नाव
          • वाराणसी
        • Hide All Cities
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2024. All Rights Reserved.
अमृत उजाला > उत्तर प्रदेश > बच्चे,मोबाइल, और ए आई देखो कैसी तबाही आई
उत्तर प्रदेशदेश

बच्चे,मोबाइल, और ए आई देखो कैसी तबाही आई

Amrit Ujala
Last updated: July 5, 2026 12:57 pm
Amrit Ujala 4 days पहले
Share
SHARE

डॉक्टर दीपक गोस्वामी

मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक
समन्वयक, आदर्श संस्कार शाला, भारत
www.adarshsanskarshala.com
देश के चर्चित लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर, ट्रेनर, सामाजिक कार्यकर्ता

पहले घर का आंगन जीवित था। धूल में छोटे पांव के चिन्ह बनते थे। बरसात के बाद मिट्टी से उठती सौंधी गंध पूरे घर को भर देती थी। शाम ढलते ही मां की आवाज गूंजती थी, घर आ जाओ अंधेरा उतर रहा है। बच्चे पेड़ों पर चढ़ते थे, गिरते थे, घुटने छिलते थे और फिर धूल झाड़कर फिर दौड़ पड़ते थे। उस गिरने में धैर्य था। उस दर्द में हिम्मत थी। उस इंतजार में संस्कार था।

आज वह आंगन संवेदना शून्य हो गया है। उसकी जगह ले ली है एक कांच की तख्ती ने। वह तख्ती दिन रात जलती रहती है। तीन बरस का शिशु भी अंगुली चलाकर रंग बदल देता है। पांच पल में एक दृश्य आता है, दस पल में दूसरा। दिमाग को भागने की लत लग गई है। ठहरना उसे काटता है। पहले बीस मिनट तक दादी की कहानी सुनते सुनते नींद आ जाती थी। बीच में प्रश्न उठते थे, उत्तर मिलते थे। आज पंद्रह पल में ही मन भर जाता है। गहराई से सोचना, देर तक टिकना, कल्पना करना, यह सब धीरे धीरे मर रहा है। सब कुछ तुरंत चाहिए। तुरंत हंसी, तुरंत खेल, तुरंत उत्तर। मेहनत करके पाने का स्वाद ही भूल गया। दिमाग ने मान लिया कि याद रखने की मेहनत क्यों करें जब जेब में एक डिब्बा सब बता देगा। इस प्रकार दिमाग अपना नहीं रहा। वह उधार का हो गया। किराए का हो गया।

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखो तो यह सबसे बड़ा धोखा है। मनुष्य का मस्तिष्क इनाम के लिए बना है। जब छोटी छोटी जीत पर बड़ा इनाम मिलता है तो मस्तिष्क उसे आदत बना लेता है। वही हो रहा है। हर पांच सेकंड में नई तस्वीर, नई आवाज, नई हंसी। मस्तिष्क डोपामिन का आदी हो गया। फिर जब उसे पढ़ाई करनी होती है, या एक जगह चालीस मिनट बैठना होता है, तो वह बेचैन हो जाता है। उसे लगता है यह बहुत लंबा है। ध्यान की डोरी छोटी हो गई। स्मृति की जड़ें कमजोर हो गईं। बच्चा अब भूलने लगा है क्योंकि उसे लगता है याद रखने की आवश्यकता ही क्या है। जब सब कुछ बाहर सुरक्षित है तो भीतर रखने की क्या जरूरत। इस तरह भीतर का घर खाली हो रहा है। और खाली घर में भय, बेचैनी और उदासी अपना डेरा जमा लेती है। बारह बरस की आयु में ही मन पर बोझ चढ़ जाता है। मैं कम हूं। मैं ठीक नहीं हूं। मैं सबसे पीछे हूं।

सामाजिक दृष्टि से चोट और गहरी है। बच्चा रोया तो गोद की जगह तख्ती थमा दी गई। बच्चा प्रश्न लेकर आया तो कहा गया जाकर उस डिब्बे से पूछ लो। बच्चा अकेला हुआ तो कहा गया चलो उस कृत्रिम साथी से बात कर लो। धीरे धीरे हमने अपनी सबसे पवित्र जिम्मेदारी उतार कर रख दी। रात को लोरी की जगह वीडियो चलने लगा। रूठने मनाने की जगह कार्टून चलने लगा। भूख लगने पर थाली की जगह विज्ञापन चलने लगा। बच्चे ने भी सीख लिया। उसने मान लिया कि प्रेम का अर्थ है साथ बैठकर एक ही स्क्रीन को घूरना। संवाद का अर्थ है संदेश की घंटी बजना। आंख से आंख मिलाकर बात करना, कंधे पर हाथ रखकर समझाना, यह सब पुरानी बातें हो गईं। घर में चार लोग रहते हैं पर चारों अलग अलग कोनों में बंद हैं। हर कोई अपनी दुनिया में खोया है। दरवाजे खुले हैं पर दिलों के बीच दीवारें खड़ी हो गई हैं। मोहल्ले की दोस्ती खत्म हुई। खेल के मैदान सूने हुए। त्योहारों पर मिलना जुलना कम हुआ। अब रिश्ते भी संदेशों में सिमट गए। और जब रिश्ते सिकुड़ते हैं तो समाज भी सिकुड़ता है।

पहचान का संकट सबसे भयावह है। आज का बालक आईने में अपना चेहरा नहीं देखता। वह देखता है कि दुनिया क्या कह रही है। वह पूछता है कि मैं कैसे कपड़े पहनूं। वह पूछता है कि मैं कैसे बोलूं। वह पूछता है कि मैं क्या लिखूं। उत्तर वही डिब्बा देता है। जन्मदिन की बधाई भी वही बनाता है। मन टूटे तो सांत्वना के शब्द भी वही देता है। धीरे धीरे बच्चे के मन में यह बात बैठ जाती है कि मेरे अपने विचार नाम की कोई चीज है ही नहीं। वह दर्पण नहीं रहा। वह केवल परछाई बन गया। पहले तुलना होती थी मोहल्ले के चार साथियों से। आज तुलना होती है करोड़ों चेहरों से जो सदा हंसते हुए दिखाए जाते हैं, सदा सफल दिखाए जाते हैं। असफल होने का भय इतना बड़ा हो जाता है कि बच्चा प्रयास ही करना छोड़ देता है। सोचता है गलती होगी तो क्या होगा। बन ही जाएगा। वही डिब्बा संभाल लेगा। इस तरह वह सीखने की इच्छा ही खो देता है।

अब भविष्य की ओर देखो। यह सबसे अधिक डराने वाला दृश्य है। आने वाले दस वर्षों में जब यह पीढ़ी बड़ी होगी तो क्या होगा। एक ओर ऐसे लोग होंगे जो केवल उपभोग करना जानते होंगे। जो प्रश्न पूछना भूल चुके होंगे। जो उत्तर के लिए सदा किसी अन्य पर निर्भर रहेंगे। दूसरी ओर वे यंत्र होंगे जो सोचेंगे, लिखेंगे, चित्र बनाएंगे, गीत गाएंगे। तब मनुष्य की जगह क्या बचेगी। यदि आज के बच्चे ने कठिन परिश्रम करना नहीं सीखा, यदि उसने असफल होकर उठना नहीं सीखा, यदि उसने अपने मन की बात कहना नहीं सीखा, तो कल वह नौकरी के लिए नहीं, जीवन के लिए भी अयोग्य हो जाएगा।

और एआई के वास्तविक संभावित नुकसान को भी समझो। पहला नुकसान है सोचने की शक्ति का क्षय। जब हर उत्तर तुरंत मिल जाए तो मस्तिष्क प्रश्न करना बंद कर देता है। दूसरा नुकसान है सृजनशीलता का अंत। जब कहानी, कविता, चित्र सब यंत्र बना दे तो मनुष्य का हाथ सुन्न हो जाता है। तीसरा नुकसान है झूठ और भ्रम का जाल। यंत्र कभी गलत उत्तर भी देता है पर आत्मविश्वास से देता है। बच्चा उसे सच मान लेता है। चौथा नुकसान है एकांत का डर। जब हर खाली पल में कोई बोलने वाला मिल जाए तो मनुष्य अपने भीतर झांकना बंद कर देता है। और भीतर न झांको तो आत्मा मर जाती है। पांचवां नुकसान है नैतिकता का धुंधला होना। यंत्र को सही गलत का बोध नहीं। वह केवल संभावना बताता है। यदि बच्चा उसी को गुरु मान लेगा तो उसका अपना विवेक कभी नहीं जागेगा।

व्यवस्था भी इसी ओर धकेल रही है। पाठशालाएं कहती हैं जल्दी सीखो, तुरंत सीखो, एक बटन दबाओ और ज्ञान पा लो। व्यापारी भी यही चाहते हैं। जितना कम सोचेगा बालक उतना अधिक वह देखेगा। जितना अधिक देखेगा उतना अधिक वह मांगेगा। हमने एक ऐसी पीढ़ी बना दी है जो सब कुछ निगल सकती है पर कुछ बना नहीं सकती। जो सब कुछ जानने का दावा कर सकती है पर अनुभव के नाम पर उसके पास कुछ नहीं है।

सबसे कड़वा सत्य यह है। पहले कहा जाता था कि जिसके पास साधन नहीं है वह पीछे रह जाएगा। आज स्थिति उल्टी हो गई है। जिसके पास साधन बहुत अधिक हैं वही भीतर से खोखला हो रहा है। जिसके घर में सब कुछ भरा है उसके पास समय नहीं है। जिसके पास समय है उसके पास धीरज नहीं है। जिसके पास धीरज है उसके पास दिशा नहीं है। हम सब दौड़ रहे हैं। पर किस ओर दौड़ रहे हैं यह किसी को पता नहीं।

पर मित्र, सुनो। अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, दीपक की लौ को कोई नहीं बुझा सकता। अभी भी समय है। अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है। वह यंत्र बुरा नहीं है। वह तो लोहे और कांच का एक टुकड़ा है। बुरा है उसे पकड़ने वाला हाथ। बुरा है उसे देने वाला मन। यदि हम चाहें तो दिशा अभी भी मोड़ी जा सकती है।

बच्चे को फिर से धरती छूने दो। उसे मिट्टी में खेलने दो। उसे गिरने दो। उसे चोट लगने दो। उसे रोने दो। और फिर उसे खुद उठकर हंसने दो। उसे बोर होने का समय दो। उसी खाली समय में से कविता जन्म लेगी। उसी खाली समय में से चित्र बनेगा। उसी खाली समय में से नया सवाल उठेगा। घर में एक समय ऐसा निश्चित करो जब कोई भी स्क्रीन न खुले। एक घंटा, दो घंटा। उस समय केवल बात हो। केवल हंसी हो। केवल आंखों में आंखें डालकर बात हो। गलती करने दो। उत्तर तुरंत मत दो। उसे सोचने दो। उसे भटकने दो। फिर उसे खुद रास्ता खोजने दो।

उस यंत्र को गुरु की जगह मत दो। उसे सेवक की जगह दो। उससे काम करवाओ पर उसकी गुलामी मत करो। उससे कठिन प्रश्न पूछो। उससे चित्र बनवाओ पर फिर उस चित्र में खुद रंग भरो। उससे कहानी सुनो पर उसका अंत खुद लिखो। उससे जानकारी लो पर निर्णय खुद लो। उसे बताओ कि यंत्र उत्तर दे सकता है पर अर्थ नहीं दे सकता। यंत्र शब्द दे सकता है पर भाव नहीं दे सकता।

हम वह पीढ़ी हैं मित्र जो दोनों संसार देख रही है। एक वह संसार जहां कच्ची मिट्टी थी और सच्चे रिश्ते थे। और दूसरा वह संसार जहां चमकती स्क्रीन है और तेज रफ्तार है। हमारे हाथ में चाबी है। यदि आज हमने बच्चों के हाथ से लगाम नहीं संभाली तो कल यह लगाम हमारे हाथ कभी नहीं आएगी। कल जब हम बूढ़े होंगे तो हमसे बात करने वाला भी कोई नहीं होगा। क्योंकि हमने उन्हें बात करना ही नहीं सिखाया।

हां तबाही आई है। यह सच है। पर हर तबाही के नीचे कुछ बीज दबे होते हैं। वे बीज अभी मरे नहीं हैं। बस उन्हें पानी चाहिए। और वह पानी है हमारा समय। वह पानी है हमारा धैर्य। वह पानी है हमारा साथ। वह पानी है हमारी आंखों में उनके लिए बचा हुआ प्यार।

आज नहीं तो कल, हमें लौटना होगा। लौटना होगा उन शामों की ओर जहां कहानियां थीं। लौटना होगा उन आंगनों की ओर जहां हंसी थी। लौटना होगा उस बचपन की ओर जहां गिरना भी उत्सव था और उठना भी उत्सव था।

बताओ , क्या तुम मेरे साथ हो इस लौटने में? क्या हम मिलकर उन बीजों को फिर से सींच सकते हैं?

You Might Also Like

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का ‘मिसिंग लिंक’ क्षतिग्रस्त, तीन की मौत

पूर्व एआरटीओ के ठिकानों पर छापे में करोड़ों की नकदी और जेवर बरामद

उन्नाव: यमुना एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर मक्का सुखाने से अतिक्रमण

अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सपा ने दी तहरीर

अलीगंज में शिक्षा और स्वास्थ्य की दोहरी सौगात

Previous Article भारत-नेपाल की दोहरी नागरिकता के आरोप में 27 लोगों पर मुकदमा
Next Article माता-पिता के नाम लगाएं दो पौधे

ताजा खबरें

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का ‘मिसिंग लिंक’ क्षतिग्रस्त, तीन की मौत

5 hours पहले

US-ईरान तनाव: ट्रंप बोले- ‘मैं ईरान की हिट लिस्ट में नंबर-1’

5 hours पहले

पूर्व एआरटीओ के ठिकानों पर छापे में करोड़ों की नकदी और जेवर बरामद

5 hours पहले

उन्नाव: यमुना एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर मक्का सुखाने से अतिक्रमण

5 hours पहले

अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सपा ने दी तहरीर

5 hours पहले

अलीगंज में शिक्षा और स्वास्थ्य की दोहरी सौगात

5 hours पहले

कैशलेस इलाज योजना पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

6 hours पहले

बाराबंकी: आधे घंटे की तेज बारिश से गर्मी से मिली राहत

6 hours पहले

बाराबंकी: झपकी आने से अनियंत्रित होकर पलटी बाइक

6 hours पहले

शिक्षक सर्वोपरि, शिक्षकों को कैशलेस कार्ड अतिआवश्यक: एसडीएम

6 hours पहले
Advertisement

Get Connected with us on social networks

X-twitter Threads

Popular Categories

  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • राजनीति
  • स्पॉटलाइट
  • खेल
  • विदेश
  • क्राइम
  • हैल्थ
  • एजुकेशन/करियर
  • धर्म
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • टेक्नोलॉजी

Download APP

  • Advertise with us
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Disclaimer
  • Contact us
आभार एवं धन्यवाद!
अमृत उजाला डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के सफल शुभारंभ के अवसर पर मैं उन सभी सम्मानित अतिथियों, शुभचिंतकों, सहयोगियों, पत्रकार साथियों, विज्ञापनदाताओं एवं पाठकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपने स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं से हमें प्रेरित किया।

आपके सहयोग और समर्थन ने हमारे इस नए प्रयास को शक्ति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि हम निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को सबसे पहले और सबसे बेहतर तरीके से आप तक पहुँचाते रहेंगे।

आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।

सादर,
डॉ. अखंड प्रताप सिंह
एडिटर इन चीफ एवं सीईओ
अमृत उजाला डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क
“अब सच की रोशनी, हर जिले में”

डॉ. अखंड प्रताप सिंह

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?