शिमला: हिमाचल प्रदेश में बुधवार की सुबह भूकंप के झटकों ने लोगों को अचानक डरा दिया। तड़के करीब 5:46 बजे धरती हिलने लगी। भूकंप की तीव्रता 4.0 दर्ज की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कहीं से भी किसी व्यक्ति के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबर सामने नहीं आई है। भूकंप की पुष्टि नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) की ओर से की गई है। एजेंसी के मुताबिक इसका केंद्र शिमला से लगभग 66 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व दिशा में था। जमीन के भीतर करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हलचल हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार कंपन कुछ सेकेंड तक महसूस हुई। अचानक आए झटके से कई लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित खुले स्थानों की ओर चले गए।
शिमला के अलावा इन इलाकों में भी हिली जमीन
भूकंप का असर सिर्फ राजधानी शिमला तक सीमित नहीं रहा। सोलन, सिरमौर, बिलासपुर और मंडी के कुछ इलाकों में भी लोगों को कंपन महसूस होने की जानकारी मिली है। हालांकि, अभी तक इन जिलों से भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप का केंद्र शिमला के पूर्व-दक्षिणी हिस्से की ओर होने के चलते इसका प्रभाव जुब्बल-कोटखाई की दिशा में भी महसूस किया गया। हिमाचल प्रदेश भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। राज्य के कई क्षेत्र ऐसे जोन में आते हैं जहां भूकंप का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक है।
4.0 तीव्रता के भूकंप से कितना खतरा?
भूकंप की तीव्रता 4.0 रहने पर आमतौर पर बड़े पैमाने पर तबाही की आशंका कम होती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में नुकसान की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है। भूकंप का असर उसकी गहराई, स्थानीय भूगर्भीय स्थिति और आसपास मौजूद इमारतों की मजबूती जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है। भूकंप जितना शक्तिशाली होता जाता है, जमीन के हिलने की तीव्रता और नुकसान की आशंका भी उतनी बढ़ सकती है। इसी वजह से भूकंप के बाद प्रशासन और विशेषज्ञों की ओर से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
लेह-लद्दाख में भी लगातार महसूस हो रहे झटके
उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हाल के दिनों में भूकंपीय गतिविधियां देखने को मिली हैं। सोमवार सुबह लेह-लद्दाख क्षेत्र में 3.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इससे एक दिन पहले भी इसी इलाके में 4.6 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था। लगातार भूकंप के छोटे-बड़े झटके आने के कारण पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, केवल कुछ भूकंपीय घटनाओं के आधार पर किसी बड़े भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता कैसे समझें?
भूकंप की ताकत को समझने के लिए उसकी मैग्नीट्यूड महत्वपूर्ण होती है। 2.0 या इससे कम तीव्रता के झटकों को आम तौर पर बहुत हल्की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे कंपन कई बार लोगों को महसूस भी नहीं होते। जैसे-जैसे मैग्नीट्यूड बढ़ती है, भूकंप के झटके ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं। करीब 4 से 5 तीव्रता वाले भूकंप लोगों को आसानी से महसूस हो सकते हैं और कमजोर ढांचे वाली इमारतों में मामूली नुकसान की स्थिति बन सकती है। वहीं अधिक तीव्रता वाले भूकंप बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बड़े भूकंप बन चुके हैं तबाही की वजह
तेज भूकंप किस तरह बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है, इसका उदाहरण दुनिया के कई हिस्सों में देखने को मिला है। हाल में कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप की घटना ने भी भारी तबाही मचाई थी। कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। ऐसे शक्तिशाली भूकंपों में जान-माल का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हिमाचल में आया बुधवार सुबह का 4.0 तीव्रता वाला भूकंप फिलहाल बड़े नुकसान से जुड़ा नहीं है, लेकिन घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता की ओर ध्यान जरूर खींचा है।




















