कबीर सर्किट के रूप में विकसित हो रही संत कबीर की धरती
अरुण सिंह, अमृत उजाला
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश को पर्यटन की दृष्टि से नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रदेश सरकार संत कबीर की तपोभूमि संतकबीरनगर को प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल कर रही है। इसी क्रम में जिले को ‘कबीर सर्किट’ के रूप में विकसित किए जाने की विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के ठहराव की व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से होटल निर्माण की परियोजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनमें से कुछ परियोजनाएं पूर्णता के निकट हैं, जबकि अन्य पर कार्य जारी है।
प्रदेश सरकार का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को मगहर और आसपास के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के दौरान बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पर्यटन की दृष्टि से संभावनाशील संतकबीरनगर में हाल के वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
मगहर में विकास परियोजनाओं को मिली गति
संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर को आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विभिन्न विकास कार्य कराए गए हैं। पर्यटन एवं सौंदर्यीकरण के अंतर्गत स्वदेश दर्शन योजना के तहत कबीर चौरा परिसर में लगभग 17.67 करोड़ रुपये की लागत से 20 परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं। इनमें आमी घाट एवं कबीर तलैया घाट का सौंदर्यीकरण, लेजर आधारित साउंड एंड लाइट शो, म्यूजिकल फव्वारा, सोलर लाइटिंग, कैफेटेरिया, आकर्षक पार्कों तथा कबीर एकेडमी का निर्माण शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के मगहर आगमन से भी इस स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली है।
तामेश्वरनाथ धाम में बन रहा कॉरिडोर
महाभारतकालीन तामेश्वरनाथ धाम को धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से यहां कॉरिडोर निर्माण का कार्य प्रस्तावित एवं प्रगतिशील है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान माता कुंती एवं पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। वहीं, भगवान बुद्ध के भी इस क्षेत्र से जुड़े होने की लोकमान्यता प्रचलित है।
कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने और पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
बखिरा झील समेत अन्य स्थलों का विकास
जनपद को समग्र पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना के तहत कोपिया शिव मंदिर, भंगेश्वरनाथ शिव मंदिर, कोपिया बौद्ध स्तूप, धर्मसिंहवा स्तूप तथा बखिरा झील सहित अनेक स्थलों पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।
विशेष रूप से बखिरा झील को इको-टूरिज्म और पक्षी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयास जारी हैं। इसके अतिरिक्त नदी घाटों के सौंदर्यीकरण एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी कार्य किया जा रहा है।
बैजूनाथ धाम को भी मिल रही पहचान
कुआनों नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक बाबा बैजूनाथ धाम जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जनकपुर से विवाह उपरांत अयोध्या लौटते समय भगवान श्रीराम, माता सीता एवं उनके परिजनों ने यहां विश्राम कर भगवान शिव की आराधना की थी।
श्रावण मास में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यहां आगमन के बाद इस धाम को धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से नई पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
पर्यटन से रोजगार की नई संभावनाएं
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि कबीर सर्किट, धार्मिक स्थलों के विकास, होटल परियोजनाओं तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे स्थानीय व्यापार, परिवहन, आतिथ्य उद्योग और हस्तशिल्प क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।








