बंथरा क्षेत्र के कन्नीखेड़ा गांव में बुधवार शाम रिमझिम बारिश के दौरान एक किसान का दो कमरों वाला कच्चा मकान अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे के वक्त किसान अपने परिवार के साथ मकान के अंदर मौजूद था। गनीमत रही कि छत का एक हिस्सा गिरने की आवाज सुनकर परिवार के लोग समय रहते बाहर निकल आए। इसके कुछ ही देर बाद मकान के दोनों कमरे दीवारों समेत धराशायी हो गए। समय रहते बाहर निकलने से परिवार के सभी सदस्य बाल-बाल बच गए।
कन्नीखेड़ा निवासी किसान प्रमोद पटेल अपनी पत्नी राधा, बेटी प्रज्ञा और बेटे शौर्य के साथ कच्चे मकान में रहकर खेती-किसानी करते हैं। बुधवार को दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। शाम करीब पांच बजे भी हल्की बारिश हो रही थी। इसी दौरान प्रमोद अपने परिवार के साथ मकान के एक कमरे में बैठे थे। अचानक कच्ची छत का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। इससे परिवार में अफरा-तफरी मच गई और सभी लोग तुरंत मकान से बाहर निकलने लगे।
परिवार ने आनन-फानन में कमरे के अंदर रखा जरूरी सामान भी बाहर निकालना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ सामान तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन काफी सामान अंदर ही रह गया। परिवार के सभी सदस्य दोनों कमरों से बाहर निकल चुके थे। इसके कुछ ही देर बाद पूरा मकान तेज आवाज के साथ दीवारों समेत गिर गया। मकान के मलबे में घर का काफी सामान दब गया, जिससे परिवार को भारी नुकसान हुआ है।
मकान पूरी तरह गिरने के बाद प्रमोद पटेल के परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल उन्होंने पत्नी और बच्चों के साथ पास में रहने वाले अपने बड़े भाई बच्चा पटेल के घर में शरण ली है। पीड़ित किसान का कहना है कि मकान गिरने के बाद परिवार के सामने रहने और घरेलू सामान की व्यवस्था करने की बड़ी चुनौती है। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता और आवास संबंधी मदद की गुहार लगाई है।






















