संतों की हुंकार के आगे झुके अपराधी:
आरोपियों पर त्वरित कार्रवाई से संतुष्ट हुए महंत एकनाथ महाराज, बोले- योगीराज में कानून से ऊपर कोई नहीं; राम मंदिर के धन की पूरी वसूली का जताया भरोसा।
अयोध्या। उत्तर प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर एक बार फिर देखने को मिला। ओजस्वी भारत फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जगतगुरु परमहंस आचार्य के उत्तराधिकारी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने राज्य सरकार की त्वरित कार्रवाई से संतुष्ट होकर अपना मौन व्रत समाप्त कर दिया। मौन व्रत तोड़ने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की न्यायप्रिय कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने संत समाज की आवाज को गंभीरता से सुना और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की।
महंत एकनाथ महाराज ने कहा, “माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने संतों की आवाज को सर-आंखों पर रखा। जैसे ही हमने इस विषय को उठाया, सरकार ने बिना किसी देरी के मामले का संज्ञान लिया, निष्पक्ष जांच कराई और आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। इसी न्यायपूर्ण कार्रवाई से संतुष्ट होकर मैंने अपना मौन व्रत समाप्त किया है।”
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार में कई जनप्रतिनिधि होते हैं, लेकिन यदि कुछ लोगों की नीयत खराब हो जाए तो उससे पूरी सरकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि “योगीराज में चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। इस मामले में सरकार ने किसी को नहीं बख्शा और निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की।”
महंत एकनाथ महाराज ने विश्वास जताया कि मामले की गहराई से जांच के लिए भविष्य में सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर के धन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी वसूली कर एक-एक पैसा पुनः मंदिर के खजाने में वापस लाया जाएगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए “श्री सीताराम” के उद्घोष के साथ कहा कि यह केवल न्याय की जीत नहीं, बल्कि संत समाज और सनातन धर्म के सम्मान की भी जीत है। उनका कहना था कि सरकार की इस कार्रवाई से संतों और आम जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।








