पश्चिम एशिया में बढ़ा युद्ध का खतरा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर व्यापक हवाई हमले किए। इस बार हमलों का दायरा सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलों, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और संचार ढांचे को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबर है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, हमले मुख्य रूप से दक्षिणी प्रांतों में हुए, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं। इस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है, इसलिए घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
हमले में क्या-क्या हुआ?
- ईरानशहर एयरपोर्ट पर मिसाइल हमला, जिससे जोरदार विस्फोट हुए।
- बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन पर बमबारी, जिसमें रेलवे कर्मचारियों के घायल होने की सूचना है।
- होर्मोजगान प्रांत के दो प्रमुख पुल ध्वस्त, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो गया।
- मोबाइल और संचार टावर पर हमला, जिसके बाद बंदर अब्बास के कई हिस्सों में बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हुईं।
- केशम द्वीप, बुशहर और अहवाज सहित कई शहरों में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
ट्रंप की चेतावनी के बाद कार्रवाई
दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि तेहरान वार्ता के लिए आगे नहीं आया तो उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। इसके बाद अमेरिकी सेना ने अपने अभियान का विस्तार करते हुए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले शुरू कर दिए।
ईरान का पलटवार
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। दोनों देशों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति होने के कारण क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
पूरे खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी चिंता
- कुवैत के आसमान में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
- बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रही तो संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल सकता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।







