प्रयागराज। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मेजा ऊर्जा निगम (प्रा.) लिमिटेड ने ग्रामीण बच्चों की शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल की। नैगम सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत ‘डिजिटल विद्या मिशन’ के अंतर्गत मेजा ऊर्जा निगम से प्रभावित ग्रामों के 10 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सलैया कला प्राथमिक विद्यालय में हुआ। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा का बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
स्मार्ट क्लास की सुविधा मिलने से अब इन विद्यालयों के बच्चों के लिए पढ़ाई का अनुभव पहले से अधिक रोचक और आसान होगा। पाठ्यक्रम से जुड़े विषयों को ऑडियो-विजुअल और डिजिटल माध्यमों से समझने का अवसर मिलने से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ेगी और कठिन विषयों को भी वे आसानी से समझ सकेंगे। ग्रामीण परिवेश में डिजिटल शिक्षा की यह सुविधा बच्चों को बदलती शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के साथ उनके भीतर नई चीजें सीखने और जानने की जिज्ञासा को भी बढ़ावा देगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मेजा ऊर्जा निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री जी. श्रीनिवास राव ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ आधुनिक तकनीक से जोड़ना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट क्लास के माध्यम से विद्यार्थी विषयों को सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से समझ सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल शिक्षा ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और मेजा ऊर्जा निगम ग्रामीण विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रयास कर रहा है।
इस पहल को लेकर विद्यालय के शिक्षकों, ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों में भी खुशी देखने को मिली। उन्होंने मेजा ऊर्जा निगम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्मार्ट क्लास से बच्चों को पढ़ाई के दौरान चित्र, वीडियो और अन्य डिजिटल माध्यमों का लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में श्री नरेंद्र नाथ सिन्हा (मुख्य महाप्रबंधक-संचालन एवं रखरखाव), श्री शरद सिंह (महाप्रबंधक-परियोजना), श्री अशोक कुमार सामल (महाप्रबंधक-अनुरक्षण), श्री विवेक चन्द्र (अपर महाप्रबंधक-मानव संसाधन), श्री अजय सिंह (उप महाप्रबंधक-मानव संसाधन) सहित संबंधित ग्राम प्रधान, प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस पर शुरू हुई यह पहल ग्रामीण बच्चों के सपनों को डिजिटल शिक्षा की नई रोशनी देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।






















