वकीलों ने किया कार्य बहिष्कार; जिला जज की मध्यस्थता के बाद लौटे
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने बुधवार को जेल में बंद आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी मिलते ही अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। उनका कहना था कि पुलिस को आरोप पत्र दाखिल करने से पहले उनकी ओर से दी गई आपत्ति पर सुनवाई करनी चाहिए थी। इससे कोर्ट परिसर में काफी देर तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही।
मामला विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत से जुड़ा है। पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र दाखिल किया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया था कि पहली गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने से पहले चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
जिला जज की मध्यस्थता के बाद कोर्ट पहुंचे अधिवक्ता
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अधिवक्ताओं ने अदालत के बाहर विरोध शुरू कर दिया। अधिवक्ताओं का कहना था कि उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पहले ही पुलिस को तहरीर दी है। ऐसे में उनकी आपत्ति पर विचार किए बिना चार्जशीट दाखिल किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया।
बाद में जिला जज की मध्यस्थता के बाद अधिवक्ता वापस लौटे और विशेष न्यायाधीश की अदालत पहुंचे। पांच अधिवक्ता कोर्ट के अंदर गए और बाकी बाहर रहे। चार्जशीट पढ़ने के बाद अधिवक्ता वापस लौट आए।
आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ आरोप पत्र
पुलिस की चार्जशीट में जेल में निरुद्ध टिन्नू यादव, करुणेश, मनीष, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, रमाशंकर, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ल और लवकुश मिश्र समेत आठ आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का उल्लेख है।
अब इस चार्जशीट में राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बैंककर्मियों की भूमिका को लेकर पुलिस ने क्या तथ्य दर्ज किए हैं, इस पर विशेष नजर है। अधिवक्ताओं की ओर से जिन ट्रस्ट पदाधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है, उनके नाम चार्जशीट में किस रूप में आए हैं या नहीं आए हैं, यह अदालत में दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज
चार्जशीट दाखिल होने से पहले ही मामले में कई आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज हो चुकी हैं। अनुकल्प मिश्र, करुणेश पांडेय और लवकुश मिश्र की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने खारिज की थी। इसके अलावा अविनाश शुक्ल, रमाशंकर मिश्र और मनीष यादव की जमानत अर्जी भी निरस्त की जा चुकी है।
चार्जशीट तय कानूनी समयसीमा के भीतर दाखिल होने के बाद आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलने की स्थिति भी बदल गई है। अब मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में आगे बढ़ेगी।
मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी हुई थी सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं। 21 सितंबर की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया था कि चार्जशीट जल्द दाखिल की जाएगी। सरकार ने जांच में CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण की जानकारी भी अदालत को दी थी।
अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में पुलिस की जांच के निष्कर्ष और आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों का परीक्षण अदालत की प्रक्रिया के तहत होगा।





















