36 हजार से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज दाखिल
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा धनराशि से जुड़े बहुचर्चित मामले में एसआईटी की जांच के बाद अदालत में दाखिल आरोपपत्र के साथ करीब 36,039 पन्नों के दस्तावेज, 101 सीडी और 133 गवाहों की सूची सामने आई है। मुख्य आरोपपत्र 59 पन्नों का बताया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में दस्तावेज और गवाहों के बयान अब मुकदमे की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इन गवाहों में ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान खास महत्व रख सकता है। चढ़ावे की गणना और लेखा व्यवस्था से जुड़े रहने के कारण महिपाल को मामले की आंतरिक प्रक्रिया की जानकारी थी। उन्होंने चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाने और ट्रस्ट के पदाधिकारियों को इसकी जानकारी देने का दावा किया था। अब अदालत में उनकी गवाही के दौरान यह महत्वपूर्ण होगा कि उन्होंने क्या देखा, किस समय देखा और इसकी सूचना किसे दी।
महिपाल की गवाही पर क्यों टिकी नजर
महिपाल सिंह जनवरी 2021 से मई 2022 तक ट्रस्ट के लेखा प्रभारी रहे थे। चढ़ावे की रकम, नकदी और अन्य सामग्री की गणना तथा लेखा व्यवस्था से जुड़े होने के कारण उनकी भूमिका मामले के उस हिस्से से संबंधित है, जिसमें चढ़ावे के प्रबंधन और कथित अनियमितताओं के सवाल उठे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में नई एसआईटी ने वीडियो कॉल के जरिये उनका क्रमवार बयान दर्ज किया था। अदालत में उनकी गवाही के दौरान उनके पहले दिए गए बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच सामंजस्य भी महत्वपूर्ण होगा।
नकदी, सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा पर उठे थे सवाल
महिपाल ने कथित तौर पर नकदी के अलावा सोना-चांदी और विदेशी मुद्रा से जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों को शिकायत की जानकारी देने की बात कही थी।
अब न्यायिक प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि उनकी शिकायत कब की थी, उसमें किन अनियमितताओं का उल्लेख था और उसके बाद ट्रस्ट स्तर पर क्या कदम उठाए गए। किसी व्यक्ति के बयान में किसी का नाम आने मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर ही निकलेगा।
चंपत राय की गवाही भी अहम
मामले में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय आरोपी नहीं हैं, बल्कि गवाह बनाए गए हैं। एसआईटी के आरोपपत्र में उनके खिलाफ कोई आपराधिक संस्तुति नहीं की गई है। इसी तरह ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी आरोपी के बजाय गवाह बनाया गया है।
चंपत राय की गवाही मामले की शुरुआती जानकारी और उसके बाद ट्रस्ट स्तर पर हुई कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को सामने ला सकती है। आरोपपत्र के अनुसार चार जून को गणना कर्मियों ने चढ़ावा चोरी से संबंधित वीडियो और संदेश उन्हें भेजे थे। इसके बाद उनके आवास पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारी पहुंचे और वीडियो देखे गए।
अनिल मिश्र और गोपाल राव भी गवाह
डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी आरोपपत्र में गवाह हैं। दोनों ट्रस्ट की व्यवस्थाओं से जुड़े रहे हैं। उनकी गवाही से चढ़ावा गणना की व्यवस्था, सुरक्षा एवं निगरानी, घटना की जानकारी मिलने और उसके बाद उठाए गए कदमों से संबंधित जानकारी सामने आ सकती है।
133 गवाह, 101 सीडी और हजारों दस्तावेज
एसआईटी की ओर से दाखिल आरोपपत्र के साथ 133 गवाहों का उल्लेख, 101 सीडी और 36,039 पन्नों के दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेजों को कई बक्सों और गत्तों में भरकर अदालत लाया गया था। अदालत ने दस्तावेजों का मिलान और परीक्षण शुरू किया है।
मामले में आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
अब अदालत में गवाही से खुलेगा घटनाक्रम
एसआईटी की जांच और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण न्यायिक प्रक्रिया है। महिपाल सिंह सहित 133 गवाहों की गवाही, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का घटनाक्रम क्या था और इसमें आरोपियों की भूमिका क्या रही।
इस मामले में आरोपपत्र दाखिल होना अपने आप में किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों और गवाहियों की पूरी जांच के बाद होगा।





















