स्लीपर बस अग्निकांड: 19 चालान के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस
लखनऊ। यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के बाद बस के संचालन और परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच से जुड़े विवरण में सामने आया है कि हादसे का शिकार हुई बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान लंबित थे। इनमें कई चालान यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा।
हादसे के बाद बस की फिटनेस, परमिट, बीमा और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बस अलग-अलग राज्यों से जुड़े दस्तावेजों के साथ संचालित हो रही थी। बस का फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान और प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी होने की जानकारी सामने आई है, जबकि बस का संचालन दिल्ली से महोबा के बीच किया जा रहा था।
19 चालान के बाद भी नहीं रुका संचालन
यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात बस में आग लगने के बाद शुरुआती जांच में सामने आया कि वाहन पर पहले से बड़ी संख्या में चालान थे। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, 19 चालानों की कुल राशि करीब 1.75 लाख रुपये थी और इनमें अधिकांश चालान ओवरस्पीड से जुड़े बताए गए। जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने के मामले में भी चालान होने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार नियम उल्लंघन के रिकॉर्ड के बावजूद बस सड़क पर कैसे चलती रही। क्या केवल चालान काटना ही पर्याप्त कार्रवाई थी या वाहन को रोकने, उसकी फिटनेस की दोबारा जांच करने और नियमों के गंभीर उल्लंघन की स्थिति में परमिट संबंधी कार्रवाई की जरूरत थी—हादसे के बाद इन सवालों पर जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल
बस में आग लगने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों में बस में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और फायर सेफ्टी इंतजाम नहीं होने की बात सामने आई है। स्लीपर बसों में आग की स्थिति से निपटने के लिए फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम तथा पर्याप्त क्षमता वाले अग्निशमन यंत्रों की जरूरत पर परिवहन विभाग की ओर से निर्देश जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
लखनऊ जोन के आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय के अनुसार, लंबी दूरी की स्लीपर बसें अलग-अलग एक्सप्रेसवे के रास्ते एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में निकल जाती हैं। उन्होंने बताया कि चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं और नियम तोड़ने पर जुर्माना भी किया जाता है। साथ ही बस ऑपरेटरों द्वारा वाहनों में किए जाने वाले बदलाव भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
फिटनेस व्यवस्था पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद बसों की फिटनेस जांच की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवहन विभाग में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें अनफिट बस को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। निजी फिटनेस सेंटरों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इससे यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि किसी वाहन के खिलाफ लगातार चालान दर्ज होने के बावजूद उसकी फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की प्रभावी जांच किस स्तर पर हो रही थी।
पहले भी हो चुके हैं बस हादसे
लंबी दूरी की बसों के संचालन में सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। लखनऊ के मोहनलालगंज में हुए एक अन्य बस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई थी। संबंधित बस के अनफिट होने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई थी।
यमुना एक्सप्रेसवे की इस घटना ने एक बार फिर लंबी दूरी की स्लीपर बसों की निगरानी, वाहन फिटनेस, चालकों की व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे की जांच में यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो यह भी स्पष्ट करना होगा कि पहले से दर्ज चालानों और अन्य कमियों के बावजूद संबंधित वाहन को सड़क पर चलने से रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।





















