ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग
सुलतानपुर। जिले के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के बिरईपुर भटपुरा गांव में झाड़-फूंक और निजी परिसर में बने कथित मजारनुमा ढांचों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि कोई अवैध गतिविधि हो रही है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की ओर से धर्म परिवर्तन या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्या है मामला?
ग्रामीणों के अनुसार, गांव निवासी सुनील कुमार निषाद अपने घर पर झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र से जुड़े अनुष्ठान करते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि उनके निजी परिसर में आठ मजारनुमा संरचनाएं बनाई गई हैं, जहां दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं।
कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि इस गतिविधि की आड़ में लोगों को गुमराह किया जा रहा है तथा धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियां संचालित होने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
सोशल मीडिया प्रोफाइल और पोस्टर को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुनील कुमार निषाद के मोबाइल नंबर की ट्रूकॉलर प्रोफाइल पर मस्जिद की तस्वीर दिखाई देती है। वहीं, उनके परिसर पर लगे पोस्टर में “KGN-786” और “गरीबों वाले बाबा” जैसे शब्द लिखे होने का भी दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन तथ्यों के कारण उनके मन में संदेह पैदा हुआ है। हालांकि, केवल ऐसे प्रतीकों या शब्दों के आधार पर किसी गैरकानूनी गतिविधि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता और इसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है।
सुनील कुमार निषाद ने क्या कहा?
मामले पर पूछे जाने पर सुनील कुमार निषाद ने किसी भी प्रकार के धर्म परिवर्तन के आरोप से इनकार किया। उनका कहना है कि वह किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कराते हैं।
उनके अनुसार,
“मैं हिंदू और मुस्लिम दोनों परंपराओं से जुड़े तरीकों का इस्तेमाल कर झाड़-फूंक करता हूं। यहां किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कराया जाता।”
पुलिस की भूमिका पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि इतने समय से झाड़-फूंक का यह केंद्र संचालित होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की गंभीरता से जांच नहीं की। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधि हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, इस संबंध में दोस्तपुर थाना पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
- पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- निजी परिसर में बने मजारनुमा ढांचों की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए।
- यदि धर्म परिवर्तन, धोखाधड़ी या किसी अन्य कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जाए।
- गांव में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
प्रशासनिक जांच का इंतजार
मामला धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा होने के कारण प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर धर्म परिवर्तन या अन्य गंभीर आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।







