एसडीएम कोर्ट ने फर्जीवाड़ा किया बेनकाब
गोरखपुर। जिले की बांसगांव तहसील के कौड़ीराम क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की करीब चार एकड़ सरकारी जमीन पर हुए कथित फर्जीवाड़े का 15 साल बाद बड़ा खुलासा हुआ है। एसडीएम बांसगांव की अदालत ने वर्ष 2011 के आदेश को निरस्त करते हुए वर्ष 2008 के मूल निर्णय को बहाल कर दिया है। इसके साथ ही जमीन को दोबारा ‘सरकार बहादुर कैसर हिंद’ (सरकारी खाते) में दर्ज करने का आदेश दिया गया है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पी गई थी सरकारी जमीन
मामला बांसगांव तहसील के रानीपुर गांव स्थित नजूल की लगभग चार एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन का है। आरोप है कि भू-माफियाओं और कुछ भ्रष्ट राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन को निजी नामों में दर्ज करा लिया गया। बाद में इस जमीन के हिस्से 21 अन्य लोगों को भी बेच दिए गए। वर्तमान में इस भूमि पर कई दुकानें और एक अस्पताल भी बने हुए हैं।
2007 की जांच में सामने आया था मामला
वर्ष 2007 में प्रशासनिक सर्वे के दौरान आराजी संख्या 22क, 22ख, 41 और 110 की भूमि को सरकारी संपत्ति पाया गया था। जांच में राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर जमीन को निजी स्वामित्व में दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।
फैसलों का उतार-चढ़ाव
- 2008: तत्कालीन एसडीएम प्रदीप कुमार सिंह ने दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर भूमि को सरकारी घोषित कर दिया।
- 2011: एक अन्य एसडीएम ने पूर्व आदेश पलटते हुए कब्जाधारियों के पक्ष में फैसला दे दिया।
- 2021: इस आदेश के खिलाफ शासकीय अधिवक्ता ने अपील दायर की।
- 27 अप्रैल 2026: लंबी सुनवाई के बाद एसडीएम बांसगांव की अदालत ने 2011 का आदेश रद्द कर 2008 का फैसला बहाल कर दिया।
कोर्ट का बड़ा आदेश
एसडीएम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी अवैध खरीदारों के नाम राजस्व अभिलेखों से तत्काल हटाए जाएं और पूरी भूमि पुनः सरकार के नाम दर्ज की जाए। साथ ही फर्जीवाड़े में शामिल दोषी राजस्व कर्मियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
क्या होती है ‘सरकार बहादुर कैसर हिंद’ जमीन?
‘सरकार बहादुर कैसर हिंद’ उन सरकारी जमीनों को कहा जाता है, जो ब्रिटिश शासनकाल में सरकार के स्वामित्व में थीं। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद इनका स्वामित्व केंद्र या संबंधित राज्य सरकार को प्राप्त हो गया। ऐसी भूमि पूर्णतः सरकारी संपत्ति होती है और इसे कोई निजी व्यक्ति या संस्था न तो खरीद सकती है और न ही बेच सकती है।







