रामलीला मैदानों से संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्रों तक, जल्द जनता को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
लखनऊ, 13 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 119.47 करोड़ रुपये की लागत से संस्कृति विभाग की 21 प्रमुख परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। इन परियोजनाओं में रामलीला स्थलों का कायाकल्प, सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना, संग्रहालयों का आधुनिकीकरण, स्मारकों का विकास और संगीत व नाट्य संस्थानों का उन्नयन शामिल है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ पर्यटन को भी नई गति देना है। सभी परियोजनाओं का जल्द ही लोकार्पण किया जाएगा।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभाग की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार मैनपुरी, गोरखपुर, बांदा, फिरोजाबाद, हरदोई, कुशीनगर, प्रतापगढ़, अलीगढ़, बलिया सहित कई जिलों में सार्वजनिक रामलीला स्थलों का सौंदर्यीकरण, बाउंड्री वॉल, मंच, प्रवेश द्वार, शेड और अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण पूरा हो चुका है।
सरकार ने सांस्कृतिक अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की हैं। चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि सांस्कृतिक केंद्र, आजमगढ़ के हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय, लखनऊ में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र और उसके संग्रहालय के आंतरिक कार्य, भारतेन्दु नाट्य अकादमी के नवीनीकरण, शाहजहांपुर के स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में फसाड लाइटिंग एवं म्यूजिकल फाउंटेन तथा फतेहपुर में शहीद त्रिदेव प्रसाद स्मारक का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
इसके अलावा कन्नौज में अंतरराष्ट्रीय रोमा समुदाय को समर्पित स्मारक एवं मुक्ताकाशी मंच का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बलिया के रसड़ा स्थित नाथ बाबा मेला मैदान में रिटेनिंग वॉल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक स्वरूप देने के साथ उन्हें पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक बनाया जा रहा है।
जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और उपयोगी बनाना है। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।








