नई दिल्ली/हैदराबाद। खेती में बेहतर उत्पादन अब केवल उर्वरक, सिंचाई और मिट्टी की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि आधुनिक बीज तकनीक भी कृषि की दिशा बदल रही है। इसी क्रम में हैदराबाद स्थित भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR) ने एक नई जैव-पॉलिमर आधारित स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक विकसित की है, जो फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
बीज की ताकत बढ़ाएगी नई कोटिंग तकनीक
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, इस तकनीक में बीजों पर एक विशेष जैव-अपघटनीय (Biodegradable) परत चढ़ाई जाती है। यह परत बीज और मिट्टी के बीच सक्रिय होकर सूक्ष्म पोषक तत्व, लाभकारी सूक्ष्मजीव और फसल सुरक्षा तत्व सीधे बीज तक पहुंचाती है।
इससे बीज का अंकुरण तेजी से होता है और पौधों की शुरुआती वृद्धि अधिक मजबूत और संतुलित होती है।
7 प्रमुख फसलों पर सफल परीक्षण
ICAR ने इस तकनीक का परीक्षण सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर जैसी सात प्रमुख फसलों पर किया है। फील्ड ट्रायल में पारंपरिक बीजों की तुलना में 12% से 37% तक उत्पादन वृद्धि दर्ज की गई है।
तेलंगाना में किए गए परीक्षणों में मूंगफली और सोयाबीन की पैदावार में लगभग 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई, जिसे वैज्ञानिकों ने बेहद उत्साहजनक परिणाम बताया है।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत की उम्मीद
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है जहां बारिश कम होती है या सूखे जैसी परिस्थितियां बनी रहती हैं। शुरुआती अवस्था में कमजोर पौधों की वृद्धि को यह कोटिंग मजबूती देती है, जिससे फसल का कुल उत्पादन बेहतर होता है।
किसानों के लिए कम लागत, अधिक उत्पादन का मॉडल
ICAR का कहना है कि इस तकनीक को अनाज, दालें, सब्जियां और बागवानी फसलों के लिए भी अनुकूल बनाया जा सकता है। खासकर वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में यह तकनीक किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
संस्थान ने इस तकनीक का पेटेंट भी प्राप्त कर लिया है और अब इसे राज्य बीज निगमों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और निजी कंपनियों के सहयोग से किसानों तक पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
बदलते मौसम में नई उम्मीद
अनियमित मानसून, बढ़ती लागत और जलवायु परिवर्तन के बीच यह स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा देने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे बड़े स्तर पर लागू किया गया तो कम लागत में अधिक उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।







