कक्षा 1 से 5 तक का बस्ता 7 से 8 हजार रुपये में तैयार
बाराबंकी। नये शैक्षिक सत्र की शुरू होते ही निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म, बैग, जूते और अन्य शैक्षिक सामग्री खरीदने में प्रति छात्र सात से आठ हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने बताया कि निजी विद्यालय हर वर्ष पाठय पुस्तकें बदल देते हैं और उन्हें विद्यालय द्वारा तय की गई दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है जिससे सस्ते विकल्प होने के बावजूद अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। रामसनेहीघाट क्षेत्र के करीब 500 से अधिक निजी विद्यालयों में दो लाख से अधिक छात्र छात्राएं अध्ययनरत हैं। अभिभावकों का कहना है कि इस वर्ष कागज की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, इसके बावजूद कॉपी और किताबों के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं। कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों की केवल किताबों और कॉपियों पर ही छः से सात हजार रुपये खर्च हो रहे हैं जबकि यूनिफॉर्म जूते बैग और अन्य सामग्री जोड़ने पर कुल खर्च नौ हजार रुपये तक पहुंच रहा है। बैसपुरवा निवासी राजेश कुमार ने बताया कि कक्षा तीन में पढ़ने वाले उनके बच्चे की किताबों का सेट 4,700 रुपये में मिला जबकि कॉपी रजिस्टर पर करीब 1,500 रुपये खर्च हुए। यूनिफॉर्म, जूते और बैग खरीदने के बाद कुल खर्च लगभग आठ हजार रुपये हो गया।
कधाईपुर निवासी राजकुमार ने बताया कि कक्षा चार में पढ़ने वाले उनके बच्चे का बस्ता तैयार करने में करीब साढ़े सात हजार रुपये खर्च हुए। उन्होंने बताया कि सामाजिक विज्ञान की एक पुस्तक की कीमत लगभग 500 रुपये है, जबकि 40 पृष्ठ की कुछ पुस्तकों के दाम भी 300 रुपये से अधिक हैं। मजबूरी में उन्हें सभी किताबें विद्यालय द्वारा निर्धारित दुकान से ही खरीदनी पड़ीं। अभिभावकों का कहना है कि कई निजी विद्यालय हर वर्ष पुस्तकें बदल देते हैं, जिससे पिछले वर्ष की किताबें किसी अन्य छात्र के काम नहीं आतीं। उनका आरोप है कि कई स्कूल किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म, जूते, मोजे और बैग विद्यालय परिसर या तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में बाजार में उपलब्ध सस्ते विकल्पों का लाभ अभिभावकों को नहीं मिल पाता। कई विद्यालयों में शैक्षिक सामग्री का पूरा सेट 4,500 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक में उपलब्ध कराया जा रहा है। खण्ड शिक्षाधिकारी संजय कुमार राय ने बताया कि निजी विद्यालयों द्वारा किताबों या अन्य शैक्षणिक सामग्री की खरीद को लेकर अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं हुई है। यदि किसी अभिभावक की ओर से शिकायत मिलती है तो नियमानुसार जांच कर कार्यवाही की जाएगी।








