संतकबीरनगर। करीब 19 करोड़ रुपये के कथित फर्जी जीएसटी (GST) घोटाले के मामले में दो मुख्य आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी और अजीत कुमार की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों आरोपियों को पुलिस पहले ही दिल्ली से गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज चुकी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, राज्य कर विभाग (खंड-1) के सहायक आयुक्त अरविंद कुमार की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में आरोप है कि आरोपियों ने ‘सर्व श्री यादव इंटरप्राइजेज’ के नाम से एक फर्जी फर्म का पंजीकरण कराया। फर्म का प्रोपराइटर रंजीत सिंह यादव को दर्शाया गया था, जबकि उसका पता खलीलाबाद स्थित फायर स्टेशन के पास सिटी रोड का दर्ज किया गया था।
फर्जी बिलिंग से करोड़ों की ITC का खेल
जांच में आरोप है कि फर्म ने वास्तविक रूप से कोई व्यापार नहीं किया। केवल फर्जी बिल और कागजी लेनदेन के आधार पर करीब 18.96 करोड़ रुपये की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अन्य फर्मों को पास-ऑन की गई। साथ ही लगभग इतनी ही राशि की फर्जी ITC स्वयं भी क्लेम कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
बचाव पक्ष और सरकारी पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए जमानत देने की मांग की। वहीं सरकारी पक्ष ने इसे सुनियोजित आर्थिक अपराध बताते हुए जमानत का विरोध किया और आशंका जताई कि आरोपियों के रिहा होने पर वे साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या फरार हो सकते हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता और आर्थिक अपराध की प्रकृति को देखते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे मामले की जांच और अभियोजन को महत्वपूर्ण मजबूती मिली है।
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