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धर्म

शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर को, इस रात होगी चंद्रमा से अमृत वर्षा

amritujala
Last updated: अक्टूबर 15, 2024 2:03 अपराह्न
amritujala 2 वर्ष पहले
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ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल

आाश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। शरद पूर्णिमा को ‘कौमुदी व्रत’, ‘कोजागरी पूर्णिमा’ और ‘रास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चन्द्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से युक्त होता है और इस दिन चन्द्रमा की चांदनी अमृत से युक्त होती है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 16 अक्टूबर, रात्रि 08 बजकर 40 मिनट पर और अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर, सायं 04 बजकर 55 मिनट पर। शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर को मनाया जाएगा। चन्द्रोदय का समय 05 बजकर 05 मिनट रहेगा। 16 अक्टूबर पूर्णिमा पर काफी खास संयोग बन रहा है इस दिन धुव्र योग बन रहा है। इसके साथ उत्तराभाद्र और रेवती नक्षत्र बन रहा है। चन्द्रमा मीन राशि में रहेंगे ।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने ‘रास लीला’ की थी इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते है। इस दिन प्रातः स्नान करके भगवान श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी या अपने इष्ट देव का पूजन अर्चना करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए। इस दिन रात में गाय के दूध की खीर बनाकर उसमें घी, चीनी मिलाकर अर्ध रात्रि को भगवान को भोेग लगाकर खीर को चांदनी रात में रखना चाहिए। ऐसा करने से चन्द्रमा की किरणों से अमृत प्राप्त होता है और अर्ध रात्रि में चन्द्रमा को भी अर्ध्य देना चाहिए। पूर्णिमा की चांदनी औषधि गुणों से युक्त होती है इसमें रखी खीर का सेवन करने से हमारे चन्द्र ग्रह संबंधी दोष जैसे कि कफ सर्दी छाती के रोग, मानसिक कष्ट या डिप्रेशन की समस्या और हार्मोंस संबंधी रोगों में लाभकारी है। ऐसा कथन है कि चांदनी रात में बैठने से और सुई में धागा पिरोने से आंखो की रोशनी तेज होती है और अगले दिन प्रातःकाल सूर्य उदय से पूर्व इस खीर का प्रसाद मां लक्ष्‍मी को अर्पित करके प्रसाद के रूप में सेवन करना चाहिए जिससे वर्ष भर अरोग्यता रहती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुंद्र मंथन से हुई थी। इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करने आती हैं और जो लोग रात्रि में भजन कीर्तन करते हुए मां लक्ष्मी का आह्वान करते हैं धन की देवी उनके घर में वास करती है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी व्रत भी किया जाता है। पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम में विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन किया जाता है । माता लक्ष्मी, कुबेर और इन्द्र देव का पूजन और श्री सूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी रात्रि में विचरण करती हैं और भक्तों को धन-धान्य से पूर्ण करती हैं।

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