साकार और निराकार का प्रसंग सुन गदगद हो गये श्रोता।
जलेसर। साधु संतों,देवताओं और भगवान की पत्नियां नही होती है अपितु ये श्री कहलाती हैं। पत्नियां तो सिर्फ आम जनमानस की होती हैं। उक्त उदगार क्षेत्र के गांव मीसाखुर्द में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिवस के दौरान वृन्दावन के प्रसिद्ध भागवताचार्य डॉ विनीतानंद जी महाराज द्वारा व्यक्त किए गए।
गांव मीसा खुर्द स्थित मीमेश्वर धाम में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिवस में भगवताचार्य डॉ विनीतानंद जी महाराज बताते है कि भगवान राम की भार्या श्री सीता स्वम माता लक्ष्मी का अवतार थी। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण की श्री देवी रुक्मिणी सहित उनकी सोलह हजार एक सौ आठ रानियां भी श्री ही थी। भक्त और भगवान प्रसंग की चर्चा करते
हुए भगवताचार्य ने कहा कि भक्त एक छोटे बच्चे की तरह हमेशा अपने को भगवान के सानिध्य में रखता है। इसलिए वह छोटा रहते हुए भी भगवान का सर्वाधिक प्रिय और सबसे निकट होता है। उन्होंने बताया कि जिस तरह एक छोटा बालक रूपी बालक अपनी माँ रूपी भगवान को पुकारता है तो बच्चा चाहे कितना भी गन्दा हो मगर भगवान रूपी माँ उसे अपनी गोद मे उठा लेती है। चाहे वह कितने भी कीमती वस्त्र और जेवरात क्यों न पहनी हो। उसी तरह जब एक सच्चा भक्त भगवान को पुकारता है तो भगवान उस भक्त की अवश्य सुनते है।
साकार और निराकार के प्रति जागरूक करते हुए डॉ विनीतानंद जी महाराज बताते है कि निराकर ही साकार है और साकार ही निराकार है। पानी निराकार है और यदि उस पानी को फ्रिज में रख दो तो वह बर्फ बनकर साकार रूप ले लेता है। बर्फ को वायुमण्डल में रख दो तो फिर पानी बन जाता है।
मूर्ति पूजा का खण्डन करने वालो को संदेश देते
हुए भगवताचार्य जी कहते हैं कि हवा सर्वत्र है फिर भी हम घरों में पंखे और कूलर लगाते हैं। रास्ते मे हमारी गाड़ी का टायर की हवा निकल जाती है तो हमारी गाड़ी निराकार हवा को साकार टायर में भरने से ही चलती है। वैसे ही परमात्मा सर्वत्र है। फिर भी मन्दिर की मूर्ति की पूजा से ही हमे भगवान का एहसास होता है। दान के सम्बंध
में व्यास जी महाराज बताते है कि असली दान गुप्त दान होता है। गुप्तदान का ही पुण्य होता है। यही दान संकट के समय दानी के काम आता है। दान देने वाले का जब नाम उजागर हो जाता है तो उसका पुण्य वही खत्म हो जाता है।
इस दौरान-परीक्षित कमल कुमार व मधुवाला देवी के अलावा , संजू शर्मा, ऊषा शर्मा,दिनेश शर्मा, कमल सिंह,डॉ अशोक कुमार कुशवाह,आदि के अलावा सैंकड़ों की तादाद में श्रोतागण उपस्थित रहे।







