जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और क्या चढ़ाना होगा शुभ
काशी विश्वनाथ से महाकाल तक भक्तों की भारी भीड़, जलाभिषेक और शिव आराधना से गूंजे मंदिर
लखनऊ। सावन माह का पहला सोमवार सोमवार, 3 अगस्त 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह से ही देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य श्रृंगार किया गया।
सावन सोमवार का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है। इस माह के प्रत्येक सोमवार को व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
सावन सोमवार पूजा विधि
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल से अभिषेक करें।
- पंचामृत से अभिषेक कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- पुनः स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
- बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी पत्र, चंदन, अक्षत, तिल, फल और पुष्प अर्पित करें।
- माता पार्वती को सुहाग सामग्री तथा भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर शिव परिवार की आरती करें।
सावन सोमवार के विशेष उपाय
- केसर मिश्रित जल से अभिषेक करने से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की मान्यता है।
- काले तिल से जलाभिषेक करने से शनि दोष के प्रभाव कम होने की मान्यता है।
- चांदी या तांबे के नाग-नागिन की पूजा करने से कालसर्प दोष से राहत मिलने का विश्वास है।
- श्रद्धापूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से भय और मानसिक तनाव दूर होने की मान्यता है।
राशि अनुसार शिव अभिषेक
- मेष: शहद
- वृषभ: दूध और दही
- मिथुन: गन्ने का रस
- कर्क: दही
- सिंह: शहद
- कन्या: भांग मिश्रित जल
- तुला: घी
- वृश्चिक: गंगाजल में गुलाब जल
- धनु: जल में पीली सरसों
- मकर: जल में काले तिल
- कुंभ: पंचामृत
- मीन: केसर मिश्रित दूध
काशी और महाकाल में विशेष आयोजन
सावन के पहले सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को भव्य पुष्पों से सजाया गया, जहां तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रातःकालीन भस्म आरती, पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए।







