लखनऊ। उत्तर प्रदेश को सोमवार को आधुनिक सड़क अवसंरचना की एक और बड़ी सौगात मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। लगभग 3,600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे भारत का पहला ऐसा मार्ग है, जिसका निर्माण ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन-गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) तकनीक से किया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार, नई तकनीक के उपयोग से सड़क निर्माण में अधिक सटीकता, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत सुनिश्चित हुई है। जीपीएस आधारित मशीन-गाइडेड प्रणाली के कारण निर्माण सामग्री की बर्बादी भी कम हुई है। इससे पहले इस तकनीक का उपयोग अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में किया जाता था।
सरकार का दावा है कि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा का समय घटकर 35 से 45 मिनट रह जाएगा। यह मार्ग उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या और सुलतानपुर से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी आवागमन को अधिक सुगम बनाएगा। हालांकि एक्सप्रेसवे की शुरुआत कानपुर शहर से नहीं, बल्कि शुक्लागंज-उन्नाव बायपास से होती है, जबकि इसका अंतिम छोर लखनऊ के शहीद पथ पर है।
करीब 58 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन और 13 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है। एक्सप्रेसवे पर चार बड़े पुल, 25 छोटे पुल, चार फ्लाईओवर, 11 पैदल अंडरपास और 13 हल्के वाहनों के अंडरपास बनाए गए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक्सप्रेसवे पर लगभग 100 एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे, 63 पीटीजेड कैमरे, 16 वीडियो डिटेक्शन इंसिडेंट सिस्टम और एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है। पूरे मार्ग की निगरानी एक केंद्रीय कंट्रोल सेंटर से होगी। दुर्घटना की स्थिति में 15 मिनट के भीतर राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच सकेगा। वहीं, 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ स्वचालित चालान की व्यवस्था भी की गई है।
सरकार का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे न केवल लखनऊ और कानपुर के बीच तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।







