दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उठाई मांग
अयोध्या। राम मंदिर में दिए गए समर्पण (दान) को लेकर चल रहे विवाद के बीच अयोध्या के सिंधी समाज ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि समाज प्रभु श्रीराम के प्रति पूर्ण आस्था और समर्पण रखता है तथा मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान का हिसाब मांगना उसकी परंपरा नहीं है। संत नवलराम दरबार, रामनगर कॉलोनी में आयोजित प्रेस वार्ता में समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि सिंधी समाज स्वयं को प्रभु श्रीराम का वंशज और सनातन धर्म का अनुयायी मानता है तथा धर्म की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहा है।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि विवादित ढांचे के ध्वंस के समय से लेकर श्रीराम मंदिर निर्माण तक सिंधी समाज ने हर स्तर पर सहयोग दिया है और भविष्य में भी मंदिर के प्रति उसका समर्पण बना रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते समाज द्वारा दिए गए समर्पण को विवाद का विषय बनाया और चांदी की ईंटों को लेकर अनर्गल आरोप लगाए।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का संयमपूर्वक इंतजार किया जाना चाहिए था, लेकिन कुछ लोगों ने राजनीतिक उद्देश्य से दान का हिसाब मांगकर पूरे सिंधी समाज की भावनाओं को आहत किया। उन्होंने कहा कि समाज ऐसे बयानों और व्यक्तियों से स्वयं को अलग करता है।
सिंधी समाज ने यह भी कहा कि केवल विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों से सत्य नहीं बदल जाता। समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की कि यदि SIT जांच में दान या चढ़ावे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए।
प्रेस वार्ता में समाज के प्रतिनिधियों ने दोहराया कि सिंधी समाज की पहचान सेवा, समर्पण और आस्था से है तथा वह श्रीराम मंदिर के प्रति अपनी निष्ठा को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं चाहता।








