टूटती छत और निकले सरियों के बीच मंडरा रहा हादसे का खतरा
औरैया। परिषदीय विद्यालयों में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावों के बीच अजीतमल विकास खंड के तीन विद्यालयों की जर्जर इमारतें बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित सूचना भेजे जाने के बावजूद न तो भवनों की मरम्मत कराई गई और न ही नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। ऐसे में छात्र-छात्राएं हर दिन खतरे के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
टड़वा रंगिया कंपोजिट विद्यालय में 139 बच्चे खुले में पढ़ने को मजबूर
अजीतमल विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय टड़वा रंगिया कंपोजिट में करीब 139 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय की छत का प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है और कई जगहों पर सरिया बाहर निकल आए हैं। संभावित हादसे को देखते हुए शिक्षकों ने बच्चों को जर्जर कमरों में बैठाने के बजाय खुले स्थान पर पढ़ाना शुरू कर दिया है। विद्यालय प्रशासन कई बार विभाग को लिखित रूप से अवगत करा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जलूपुर प्राथमिक विद्यालय में टपकती छत के नीचे चल रही कक्षाएं
प्राथमिक विद्यालय जलूपुर में कक्षा चार का कमरा बारिश के दौरान पूरी तरह टपकने लगता है। दीवारों और छत से लगातार पानी रिसने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई उसी कक्ष में कराई जा रही है। गीले फर्श के कारण बच्चों के फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि भवन की मरम्मत के लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला।
राजंदाज नगर स्कूल के जर्जर कक्ष पर लगाया गया ताला
प्राथमिक विद्यालय राजंदाज नगर (अटसू) में एक कक्षा की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। प्लास्टर गिरने के बाद सरिया साफ दिखाई देने लगे हैं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय प्रशासन ने उस कक्ष में पढ़ाई बंद कर ताला लगा दिया है। हालांकि अन्य कमरों में शिक्षण कार्य जारी है। अभिभावकों ने जल्द मरम्मत या नए भवन के निर्माण की मांग की है।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
लगातार जर्जर हो रहे विद्यालय भवनों की समय पर मरम्मत नहीं होने से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। शिक्षक और अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
एबीएसए बोले- प्रस्ताव भेजे गए हैं
खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) प्रवीण कुमार ने बताया कि जर्जर विद्यालयों की सूची तैयार कर उच्च अधिकारियों को मरम्मत अथवा नए भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। जहां भवन अत्यधिक असुरक्षित हैं, वहां बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।








