नई दिल्ली। छात्र आंदोलन को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR रद्द (quash) करने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े छात्रों और कार्यकर्ताओं के बीच राहत की उम्मीद जगी है। लंबे समय से इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे लोगों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। सुनवाई के दौरान CJP की ओर से सौरव दास ने CJI की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मार्च वापस लेने की जानकारी दी। यानी अब 5 सितंबर को दिल्ली में CJP की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन और मार्च नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General तुषार मेहता ने भी अहम बात कही। उन्होंने बताया कि NEET परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने को लेकर CJP नेताओं से किए गए सरकार के आश्वासन को पूरा करने के लिए केंद्र प्रतिबद्ध है। हालांकि, मुआवजे की प्रक्रिया और उसके तौर-तरीके तय करने के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से तीन महीने का समय मांगा है।
इस पूरे घटनाक्रम में तीन बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं—छात्र आंदोलन से जुड़ी FIR रद्द होना, 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लिया जाना और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की केंद्र की प्रतिबद्धता। आंदोलन के दौरान जिन छात्रों और परिवारों ने मुश्किल दौर देखा, उनके लिए अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सरकार अपने आश्वासन को जल्द अमल में लाए। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद CJP के आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति भी नए सिरे से तय होने की संभावना है।





















