Jeetendra Mishra: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम को मंजूरी दे दी है। बुधवार को ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में उनके नाम पर अंतिम सहमति बनी। मंदिर के लिए CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया काफी प्रतिस्पर्धी रही। इस पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन समिति ने आवेदनों की जांच के बाद तीन उम्मीदवारों को अंतिम सूची में शामिल किया, जिसके बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना गया। अब उनके कंधों पर दुनिया के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर के प्रशासन और व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी होगी।
देवरिया से ताल्लुक, 38 साल से ज्यादा का सैन्य अनुभव
जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपालीपुरा क्षेत्र से बताए जाते हैं। वह अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका सैन्य सफर तीन दशक से भी अधिक समय का रहा है। 6 दिसंबर 1986 को वह वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे और अपने लंबे करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। एक अनुभवी फाइटर पायलट के तौर पर उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी। उन्हें 18 से ज्यादा प्रकार के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को उड़ाने का अनुभव है। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट की जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं। इसके अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की नासिक इकाई में चीफ टेस्ट पायलट और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे।
कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा का नाम कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों और ऑपरेशनों से जुड़ा रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने मिराज-2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल को ऑपरेशनल स्तर पर तैयार करने में भूमिका निभाई थी। बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान इन हथियारों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ किया गया। उन्होंने फ्रांस में आयोजित वायुसेना के अभ्यास गरुड़-IV में भारतीय दल का नेतृत्व भी किया था। वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर वह बरेली और पठानकोट स्थित वायुसेना की विंग्स की कमान संभाल चुके हैं। पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बताई जाती है। सैन्य सेवाओं में योगदान के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर मंदिर संचालन तक होगी बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर के पहले CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी। मंदिर में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच दर्शन व्यवस्था, कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय, चढ़ावे और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा। बड़े धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को संभालना भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का लंबा प्रशासनिक, रणनीतिक और ऑपरेशनल अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





















