आर. माधवन आज हिंदी और तमिल सिनेमा के चर्चित कलाकारों में शामिल हैं, लेकिन फिल्मों में आने के शुरुआती दौर में उन्हें कई तरह की धारणाओं का सामना करना पड़ा था। अभिनेता ने हाल ही में अपने करियर के उस दौर का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया, जब उन्हें अपनी शादी को सार्वजनिक न करने की सलाह दी गई थी। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान माधवन ने अपने फिल्मी सफर और उससे जुड़े अनुभवों पर बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले ही वह टेलीविजन पर करीब 1800 एपिसोड कर चुके थे। उस समय कई लोगों का मानना था कि टीवी पर इतना काम करने के बाद उन्हें फिल्मों में बतौर अभिनेता स्वीकार करना मुश्किल होगा।
एक्टिंग में आने का नहीं था कोई प्लान
माधवन के मुताबिक, अभिनय उनके करियर का पहले से तय हिस्सा नहीं था। वह एक्टिंग सीखने या अभिनेता बनने के इरादे से मुंबई नहीं आए थे। परिस्थितियां उन्हें इस पेशे में ले आईं और देखते ही देखते उन्होंने टीवी पर लंबा सफर तय कर लिया। इसके बाद उनकी मुलाकात मशहूर फिल्म निर्देशक मणि रत्नम से हुई। मणि रत्नम ने उन्हें तमिल फिल्म ‘अलैपायुथे’ में मौका दिया। यह फिल्म उनके करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई। हालांकि, तमिल सिनेमा में एंट्री के समय भी माधवन को लेकर कई सवाल उठाए गए। उनके लुक को लेकर कुछ लोगों का मानना था कि वह उत्तर भारतीय युवक जैसे नजर आते हैं और तमिल फिल्म इंडस्ट्री उन्हें आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। इसके अलावा उनके शादीशुदा होने को लेकर भी यह धारणा थी कि रोमांटिक हीरो के रूप में दर्शक उन्हें पसंद नहीं करेंगे।
फिल्म रिलीज से पहले शादी छिपाने की सलाह
माधवन ने बताया कि फिल्म की प्रचार टीम ने उन्हें शादी की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की सलाह दी थी। टीम को डर था कि अगर दर्शकों को पता चला कि रोमांटिक फिल्म का हीरो शादीशुदा है तो इसका असर फिल्म की सफलता पर पड़ सकता है। अभिनेता को यह सलाह सही नहीं लगी। उन्होंने इस बारे में मणि रत्नम से बात की। निर्देशक ने उन्हें अपनी समझ के मुताबिक फैसला लेने की आजादी दी। इसके बाद माधवन ने तय किया कि वह अपनी शादी को छिपाकर फिल्म का प्रचार नहीं करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शादी पर ही हुआ पहला सवाल
माधवन ने बताया कि उनकी आशंका के मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहला सवाल उनकी शादी को लेकर ही आया। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या शादीशुदा होने के बावजूद वह खुद को रोमांटिक हीरो के तौर पर दर्शकों के सामने पेश कर पाएंगे। अभिनेता ने साफ किया कि वह एक किरदार निभा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि वह अपनी पत्नी के अस्तित्व को ही नजरअंदाज कर दें। उनके लिए पत्नी का सम्मान किसी फिल्म के हिट या फ्लॉप होने से ज्यादा महत्वपूर्ण था। माधवन ने माना कि इस फैसले में जोखिम था, लेकिन वह अपनी पत्नी को छिपाने के बजाय उस जोखिम को उठाने के लिए तैयार थे।
बाद में टूट गईं कई धारणाएं
माधवन ने अपने करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि शुरुआत में उनके बारे में कई तरह की धारणाएं बनाई गईं। कभी उन्हें कहा गया कि टीवी पर ज्यादा नजर आने के कारण फिल्मों में नहीं चल पाएंगे, तो कभी यह दावा किया गया कि तमिल सिनेमा के बाद हिंदी फिल्मों में उनकी जगह नहीं बनेगी। लेकिन ‘रहना है तेरे दिल में’, ‘3 इडियट्स’ और ‘गुरु’ जैसी फिल्मों ने इन धारणाओं को गलत साबित किया। माधवन का सफर इस बात का उदाहरण है कि करियर को लेकर बनाई गई धारणाएं हमेशा सही नहीं होतीं और लगातार काम करने वाला कलाकार अपनी अलग पहचान बना सकता है।





















