मायावती का बड़ा फैसला: लखनऊ की बैठक में ऐलान
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। लखनऊ में बुधवार को हुई पार्टी की अहम बैठक में इसकी घोषणा की गई। बैठक में ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया।
ईशान को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब बसपा में संगठनात्मक बदलाव का दौर चल रहा है और पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। इससे पहले मायावती ने 20 सितंबर को घोषणा की थी कि ईशान को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को फिलहाल संगठन में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
आकाश आनंद के बाद ईशान को जिम्मेदारी
मायावती ने सितंबर की शुरुआत में आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया था। इसके बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद ईशान आनंद को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा शुरू हुई।
हालांकि, ईशान की भूमिका को लेकर मायावती के रुख में भी हाल के दिनों में बदलाव देखने को मिला। 12 सितंबर को उन्होंने ईशान को सभी जिम्मेदारियों से हटाने और अपने किसी भतीजे को संगठन में पद न देने की बात कही थी। बाद में 20 सितंबर को उन्होंने ईशान को सम्मानजनक जिम्मेदारी देने का ऐलान किया।
2027 चुनाव की तैयारियों पर भी मंथन
लखनऊ में हुई बैठक में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा विभिन्न राज्यों के अध्यक्ष और संगठन से जुड़े प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की गई।
बसपा की ओर से उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर भी संगठनात्मक स्तर पर चर्चा की जा रही है। मायावती ने इससे पहले कहा था कि 23 सितंबर की बैठक में पार्टी की चुनावी तैयारियों और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में बदलावों से जुड़े फैसले किए जाएंगे।
मायावती के परिवार में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर बदलाव
ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने का फैसला बसपा में हाल के पारिवारिक और संगठनात्मक बदलावों के बीच आया है। आकाश आनंद को पहले मायावती ने अपना उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक बनाया था, लेकिन बाद में उनसे ये जिम्मेदारियां वापस ले ली गईं और सितंबर 2026 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
अब ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद बसपा के संगठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, पार्टी की ओर से आगे उनकी जिम्मेदारियों और संगठनात्मक अधिकारों का विस्तृत खाका सामने आना बाकी है।




















