अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद विवाद बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से जनौरा नाका समेत चौड़ीकरण की जद में आने वाले भवनों पर कार्रवाई की गई है। हालिया कार्रवाई के दौरान नजूल भूमि पर बने कुछ मकानों को भी ध्वस्त किया गया था। प्रशासन का कहना है कि चौड़ीकरण के लिए चिन्हित अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत की गई।
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा कि कार्रवाई से पहले गठित कमेटी ने क्षेत्र का सर्वे किया था और अतिक्रमण हटाने की संस्तुति के बाद आगे की कार्रवाई की गई। डीएम के मुताबिक यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद की गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित मकान मालिकों को मुआवजे के संबंध में बातचीत के लिए बुलाया गया है और प्रशासन उनकी बात सुन रहा है। प्रभावित लोगों को जल्द मुआवजा दिए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि प्रभावित परिवारों की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।
वहीं ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। इससे पहले भी इस मामले में राजनीतिक दलों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रभावित परिवारों के पक्ष में आवाज उठाई जा चुकी है। मामले को लेकर जांच कमेटी भी प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनका पक्ष दर्ज कर रही है।
प्रशासन की ओर से जहां चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बताया जा रहा है, वहीं प्रभावित परिवार प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर अपनी शिकायतें रख रहे हैं। अब जांच कमेटी की रिपोर्ट और प्रशासन की ओर से मुआवजे को लेकर होने वाली आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण से जुड़े इस विवाद में प्रशासनिक पक्ष और प्रभावित परिवारों की मांगों के बीच समाधान का रास्ता निकलना अहम माना जा रहा है।





















