मिडटर्म चुनाव से पहले नीतियों पर पुनर्विचार की अपील; परमाणु हथियार बनाने से इनकार
तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी जनता के नाम 25 पेज का खुला पत्र जारी किया है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए अमेरिकी मतदाताओं से आगामी मिडटर्म चुनाव में इन नीतियों पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है। पत्र में ईरान और अमेरिका के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात भी कही गई है।
IRGC का यह संदेश 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से करीब पांच सप्ताह पहले सामने आया है। रॉयटर्स के मुताबिक, पत्र में अमेरिकी मतदाताओं से ट्रंप के कांग्रेस में सहयोगी सांसदों को हटाने और अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव की अपील की गई है। IRGC ने अमेरिकी समर्थन को इजरायल और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की है।
ट्रंप पर भरोसा नहीं होने का दावा
IRGC प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने ट्रंप की नीतियों और उनके बयानों पर सवाल उठाए। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की प्रकृति को लेकर अमेरिकी जनता के सामने गलत तस्वीर पेश की है। पत्र में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताया गया है और परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों को खारिज किया गया है।
हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजरायल की स्थिति इससे अलग है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके संभावित सैन्य इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों की ओर से लंबे समय से गंभीर चिंताएं जताई जाती रही हैं। इसलिए IRGC के पत्र में किए गए दावे को ईरानी पक्ष का बयान माना जाना चाहिए।
‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे पर भी सफाई
IRGC के पत्र में ‘डेथ टू अमेरिका’ जैसे नारों का भी जिक्र किया गया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि ऐसे नारे अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि अमेरिकी सरकार और उसकी नीतियों के विरोध में हैं। पत्र में अमेरिकी जनता से क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप और इजरायल को अमेरिकी समर्थन पर सवाल उठाने की अपील की गई है।
IRGC ने अमेरिकी जनता के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की पेशकश भी दोहराई है। मोहेब्बी के अनुसार, यदि अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव होता है तो दोनों देशों के बीच सह-अस्तित्व संभव है।
ईरान का दावा- युद्ध में अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया
पत्र में IRGC ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान के परिणामों पर भी अपना आकलन पेश किया। ईरानी पक्ष का दावा है कि अमेरिका और इजरायल अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सके। इन उद्देश्यों में ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना तथा उसकी राजनीतिक दिशा में बदलाव लाना शामिल बताया गया है। यह ईरानी पक्ष का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मुद्दों पर उपलब्ध नहीं है।
होर्मुज पर भी अमेरिका को चुनौती
IRGC ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अमेरिकी दावों पर सवाल उठाए हैं। मोहेब्बी ने कहा कि कुछ तेल टैंकरों की आवाजाही सुनिश्चित कर पाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पूरा जलडमरूमध्य सामान्य रूप से खुल गया है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।
ईरान ने हाल में एक प्रस्ताव में कहा था कि कुछ शर्तें पूरी होने पर वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोल सकता है और परमाणु वार्ता फिर शुरू की जा सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान का सीधा संदेश
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव होना है। इन चुनावों के बाद कांग्रेस में दोनों प्रमुख दलों की ताकत में बदलाव हो सकता है।
IRGC का पत्र इसी चुनावी माहौल के बीच अमेरिकी मतदाताओं को सीधे संबोधित करता है। रॉयटर्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी मतदाताओं से ट्रंप की नीतियों का विरोध करने और कांग्रेस में उनके सहयोगियों को हटाने की अपील की है।
ईरान का अमेरिकी जनता तक सीधे संदेश पहुंचाने का प्रयास नया नहीं है। मौजूदा पत्र भी उसी तरह अमेरिकी घरेलू बहस और विदेश नीति को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसका अमेरिकी मतदाताओं या चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी निर्धारित नहीं किया जा सकता।




















