25 जून को FIR; चार्जशीट में दर्ज टाइमलाइन से उठे सवाल
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में दाखिल पुलिस की चार्जशीट में तत्कालीन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को लेकर घटनाक्रम की एक अहम टाइमलाइन सामने आई है। चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून 2026 को गणना कक्ष में ₹2.25 लाख मिलने की जानकारी और उसका वीडियो चंपत राय के मोबाइल पर भेजा गया था। अगले दिन उन्हें चोरी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए गए।
हालांकि, पुलिस ने चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया है। उनका बयान गवाह के तौर पर दर्ज है। चार्जशीट में ऐसा निष्कर्ष भी नहीं है कि उन्होंने चोरी में सहयोग किया, किसी आरोपी को संरक्षण दिया या जांच को प्रभावित किया। इसके बावजूद सूचना मिलने से लेकर 25 जून को FIR दर्ज होने तक की अवधि ने मामले की टाइमलाइन को महत्वपूर्ण बना दिया है।
4 जून को चंपत राय तक पहुंची थी चोरी की सूचना
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, 4 जून की रात गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने तत्कालीन महासचिव चंपत राय को मोबाइल पर संदेश और वीडियो भेजा था। इसमें गणना कक्ष के बाथरूम से बरामद करीब ₹2.25 लाख की नोटों की गड्डियों की जानकारी थी।
जांच रिपोर्टों के मुताबिक, चेकिंग शुरू होने के बाद रकम को बाथरूम में छिपाए जाने की बात सामने आई थी। बरामद रकम का वीडियो बनाकर चंपत राय को भेजे जाने का भी उल्लेख चार्जशीट में है।
5 जून को सीसीटीवी फुटेज भी देखे गए
चार्जशीट के अनुसार, अगले दिन यानी 5 जून को अयोध्या पहुंचने के बाद चंपत राय की ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस दौरान उन्हें लैपटॉप के जरिए गणना कक्ष के सीसीटीवी फुटेज दिखाए गए।
जांच में अलग-अलग तारीखों के फुटेज में चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर हटाने की घटनाओं का उल्लेख है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और बरामदगी को मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है।
पहली चोरी 3 जून को पकड़े जाने का उल्लेख
चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, चोरी की पहली घटना 3 जून को पकड़े जाने का उल्लेख है। इसके बाद 4 जून को ₹2.25 लाख की बरामदगी और उसकी सूचना चंपत राय तक पहुंचने की बात सामने आती है।
जांच में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच सीसीटीवी फुटेज में बड़ी संख्या में संदिग्ध घटनाएं सामने आने का भी उल्लेख है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में करीब 70 संदिग्ध चोरी की घटनाओं के सीसीटीवी साक्ष्य जांच में मिले थे।
25 जून को दर्ज हुई FIR
मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद 25 जून 2026 को रामजन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया था। बाद में पुलिस ने इन आठों को आरोपी बनाया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
चार्जशीट में चंपत राय आरोपी नहीं
मामले की जांच पूरी होने के बाद दाखिल चार्जशीट में चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बयान जांच में शामिल किए गए हैं और उन्हें गवाह के तौर पर रखा गया है। अदालत ने आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया है।
इसलिए केवल चार्जशीट में उनके बयान दर्ज होने या उन्हें सूचना मिलने के आधार पर उनकी आपराधिक भूमिका तय करना उचित नहीं होगा। सवाल मुख्य रूप से इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि सूचना और फुटेज सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया कब शुरू हुई और FIR तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा।
जांच में सामने आईं कई चोरी की घटनाएं
चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चढ़ावे की रकम चोरी किए जाने की कई घटनाओं का विवरण है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को अलग-अलग मौकों पर रकम हटाते हुए कई बार देखा गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से कथित चोरी की रकम से खरीदी गई संपत्ति और वाहनों से जुड़े साक्ष्य भी जुटाए हैं।
पूरे मामले की जांच में करीब 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल किए जाने की रिपोर्ट है। सात आरोपियों से कुल करीब ₹79.8 लाख की बरामदगी का भी उल्लेख सामने आया है।
अब चार्जशीट के बाद टाइमलाइन पर चर्चा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अदालत के सामने अब आठ आरोपी हैं और उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर, चार्जशीट में दर्ज घटनाक्रम के आधार पर यह सवाल चर्चा में है कि चोरी की जानकारी मिलने, सीसीटीवी फुटेज देखने और FIR दर्ज होने के बीच क्या-क्या कार्रवाई हुई।
फिलहाल उपलब्ध चार्जशीट में चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया है। इसलिए उनके खिलाफ किसी आपराधिक भूमिका का निष्कर्ष निकालने के बजाय, इस मामले में सामने आई सूचना से FIR तक की टाइमलाइन को ही जांच और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।





















