करीब 20 हजार आबादी प्रभावित, धान समेत कई फसलें डूबीं
बख्शी का तालाब। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद लखनऊ के इटौंजा क्षेत्र के तराई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। सुल्तानपुर, बहादुरपुर, लासा, अकड़रिया खुर्द, अकड़रिया कला, हीरापुरवा, जमखनवा और दुघरा समेत कई गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। स्थानीय स्तर पर करीब 20 हजार लोगों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
बाढ़ का पानी कई गांवों में घरों तक पहुंच गया है। वहीं, गांवों को जोड़ने वाले कई संपर्क मार्ग जलमग्न होने से आवागमन बाधित हो गया है। स्थिति को देखते हुए कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। खेतों में पानी भरने से धान और भिंडी समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
नाव के सहारे आवाजाही, बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता
पानी भरने के कारण कई स्थानों पर पैदल या वाहनों से आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीण नावों के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी कई जगह नाव से स्कूल जाना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी आवागमन का प्रमुख साधन नाव ही रह गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ नावों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। लाइफ जैकेट और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं होने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नावों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था कराने की मांग की है।
खेतों में भरा पानी, फसलों को नुकसान
बाढ़ के पानी से इलाके के कई खेत जलमग्न हो गए हैं। धान की फसल पानी में डूब गई है, जबकि सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसलों के खराब होने की आशंका है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। आवागमन के साथ पशुओं की देखभाल, बच्चों को स्कूल भेजने और जरूरी सामान लाने-ले जाने में भी परेशानी हो रही है।
राहत और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत और बचाव व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित गांवों में पर्याप्त नावें, लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, घरों और खेतों में भरे पानी की स्थिति को देखते हुए प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाई जाए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने से आने वाले समय में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों की निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।




















