सालों साथ रहने के बाद पति या पत्नी का किसी दूसरे व्यक्ति की ओर आकर्षित होना कई सवाल खड़े करता है। क्या इसका मतलब यह है कि रिश्ते में प्रेम खत्म हो गया? मनोविज्ञान के नजरिए से इसका जवाब इतना सीधा नहीं है। हर आकर्षण प्रेम नहीं होता और हर दूरी बेवफाई की वजह से नहीं बनती। कई बार इंसान किसी तीसरे व्यक्ति की ओर नहीं, बल्कि अपने भीतर खो चुकी उस अनुभूति की ओर खिंचता है, जिसमें उसे महत्वपूर्ण, सुना हुआ, सराहा गया और फिर से चाहा गया महसूस होता है। रिश्तों में दूरी भी अचानक नहीं आती। पहले बातचीत कम होती है, फिर एक-दूसरे की बात सुनने की आदत घटती है और धीरे-धीरे दोनों एक ही घर में रहते हुए भी अलग-अलग मानसिक दुनिया में जीने लगते हैं।
लेखक डॉ. दीपक गोस्वामी के मुताबिक, प्रेम की शुरुआत में आकर्षण और उत्साह बहुत तीव्र हो सकता है। समय के साथ रिश्ते में लगाव, सुरक्षा और आत्मीयता का महत्व बढ़ता है। ऐसे में शुरुआत वाली उत्तेजना कम होना हमेशा प्रेम खत्म होने का संकेत नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब पति-पत्नी एक-दूसरे की मौजूदगी को प्रेम की जगह गारंटी समझने लगते हैं। “तुम तो हो ही” जैसी सोच रिश्ते में अनजाने में उपेक्षा पैदा कर सकती है। बाहर का व्यक्ति कई बार इसलिए आकर्षक लगने लगता है क्योंकि वह नया होता है। उसकी अच्छी बातें दिखाई देती हैं, जबकि उसके संघर्ष और कमजोरियां सामने नहीं आतीं। इसलिए नया व्यक्ति हमेशा बेहतर हो, यह जरूरी नहीं; कई बार वह सिर्फ नया दिखाई देता है।
रिश्तों में भावनात्मक उपेक्षा भी दूरी बढ़ाने का एक बड़ा कारण बन सकती है। किसी की बात ध्यान से सुन लेना, उसकी थकान पूछना, उपलब्धि पर खुशी जताना या बिना किसी खास वजह के यह कहना कि “तुम मेरे लिए महत्वपूर्ण हो”, रिश्ते में अपनापन बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। लेखक का कहना है कि भावनात्मक दूरी केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि स्नेहपूर्ण स्पर्श और साथ बैठने की सहज आदत में भी दिखाई दे सकती है। एक ही घर में रहना या एक ही बिस्तर साझा करना अपने आप में भावनात्मक निकटता की गारंटी नहीं है। साथ होना तब महसूस होता है, जब व्यक्ति अपनी थकान, परेशानी और मन की बात जीवनसाथी के सामने बिना डर के रख सके।
रिश्ते को मजबूत रखने के लिए बड़े मौकों से ज्यादा रोजमर्रा की छोटी-छोटी मौजूदगी जरूरी है। बिना मोबाइल साथ बैठना, दिन के बारे में पूछना, पुराने दिनों को याद करना, हाथ पकड़कर चलना या गलती होने पर माफी मांग लेना रिश्ते में फिर से गर्माहट ला सकता है। अगर जीवनसाथी किसी दूसरे व्यक्ति की ओर आकर्षित हो रहा है तो केवल यह पूछना कि “वह कौन है?” ही पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी समझने की कोशिश जरूरी है कि “हमारे बीच क्या खो गया है?” हालांकि भावनात्मक जरूरतों को समझना किसी गलत संबंध को सही नहीं ठहराता। आकर्षण स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन उसके आधार पर लिया गया निर्णय व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी है। आखिरकार रिश्ते को जीवित रखने के लिए प्रेम के साथ सम्मान, सीमाएं, संवाद और लगातार देखभाल भी जरूरी है। क्योंकि आशिकी को हमेशा नया चेहरा नहीं चाहिए, कभी-कभी बस एक नजर चाहिए, जिसमें सामने वाला फिर से अपना दिखाई दे।





















