लखनऊ से जुड़ी एक पोस्ट इन दिनों चर्चा में है, जिसमें दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी अस्पताल मरीज को इलाज के लिए वापस नहीं करेगा। पोस्ट में कहा गया है कि यदि किसी सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं है तो मरीज को निजी अस्पताल भेजा जाएगा और उसके इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इस दावे को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल के कथित बयान से जोड़कर प्रसारित किया गया है। हालांकि, दिए गए टेक्स्ट में इस आदेश की तारीख, शासनादेश संख्या या आधिकारिक दस्तावेज का उल्लेख नहीं है।
पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से संपर्क के लिए कई फोन नंबर भी साझा किए गए हैं। इसके साथ ही दावा किया गया है कि जिम्मेदार अधिकारी फोन न उठाएं तो इन नंबरों पर संपर्क कर मदद मांगी जा सकती है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित नंबरों पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित विभाग या सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क विवरण की पुष्टि करें।
इसी पोस्ट में उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारियों के कथित CUG नंबरों की लंबी सूची भी साझा की गई है। इसमें आगरा, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, श्रावस्ती, सुलतानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों के मोबाइल नंबर दिए गए हैं। पोस्ट में लोगों से सीधे जिलाधिकारी से संपर्क करने और जानकारी को अपने परिचितों तक पहुंचाने की अपील की गई है। हालांकि, दिए गए टेक्स्ट में इन सभी नंबरों के वर्तमान और आधिकारिक होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में मरीजों के इलाज और अधिकारियों के संपर्क से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है। खासकर अस्पताल में भर्ती, रेफरल या सरकारी सहायता से जुड़े मामलों में संबंधित अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन या राज्य सरकार के आधिकारिक हेल्पलाइन माध्यम से जानकारी लेना सुरक्षित रहेगा। सोशल मीडिया पोस्ट में दिए गए दावों को आधिकारिक आदेश या वर्तमान सरकारी संपर्क सूची की पुष्टि के बिना अंतिम सूचना मानकर प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।





















