बहराइच: नेपाल से छोड़े गए पानी के बाद घाघरा नदी के उफनाने से बहराइच के कई इलाकों में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। महसी तहसील समेत जिले की चार तहसीलों के कई दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। घरों, स्कूलों और गांव की गलियों में पानी भरने से ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें भी पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों के सामने आगे की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ का दर्द सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के सामने खुद के लिए खाने-पीने और रहने की परेशानी है तो मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवारों का कहना है कि घर में रखा राशन और पशुओं का चारा पानी की वजह से बर्बाद हो गया है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अपने परिवार के साथ-साथ अपने मवेशियों को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं। पानी बढ़ने के साथ बाढ़ के पानी में मगरमच्छ जैसे जंगली जीवों के बहकर आने की आशंका ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
महसी तहसील के बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि मुश्किल की इस घड़ी में उन्हें प्रशासन से जिस मदद की उम्मीद थी, वह जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगह पानी घरों तक पहुंच चुका है और आने-जाने के रास्ते भी प्रभावित हैं। बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है, क्योंकि स्कूल परिसर तक पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता अब यही है कि अगर पानी और बढ़ा तो परिवार और मवेशियों को सुरक्षित स्थान तक कैसे पहुंचाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ से निपटने और राहत पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात उनकी परेशानियों की अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। बाढ़ के बीच लोग किसी तरह दिन काट रहे हैं और मदद की आस लगाए बैठे हैं। बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत, भोजन, पीने के पानी, मवेशियों के चारे और सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।





















