दाने निकलते ही डॉक्टर से संपर्क करें, खुद से दवा देना पड़ सकता है भारी
नई दिल्ली। चिकनपॉक्स यानी वरिसेला बच्चों में होने वाला बेहद संक्रामक वायरल संक्रमण है। यह वेरिसेला-जोस्टर वायरस (VZV) के कारण होता है। ज्यादातर स्वस्थ बच्चों में बीमारी गंभीर नहीं होती और समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में त्वचा के संक्रमण, निमोनिया या मस्तिष्क से जुड़ी जटिलताएं भी हो सकती हैं। शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, वयस्कों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा अधिक रहता है।
चिकनपॉक्स में आमतौर पर बुखार, थकान और भूख कम लगने के बाद शरीर पर खुजली वाले लाल दाने दिखाई देते हैं। ये दाने आगे चलकर पानी से भरे छोटे फफोलों में बदलते हैं और फिर सूखकर पपड़ी बना लेते हैं। संक्रमण के संपर्क में आने के करीब 10 से 21 दिन बाद लक्षण दिखाई दे सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति दाने निकलने से करीब 1-2 दिन पहले से लेकर सभी फफोलों पर पपड़ी बनने तक संक्रमण फैला सकता है।
चिकनपॉक्स होने पर बच्चे की देखभाल कैसे करें?
सबसे पहले बच्चे को दूसरे बच्चों और ऐसे लोगों से दूर रखें जिन्हें संक्रमण होने पर गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। बच्चे को तब तक स्कूल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं भेजना चाहिए, जब तक सभी फफोले सूखकर पपड़ी में न बदल जाएं।
खुजली कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से कैलामाइन लोशन या ठंडे पानी से स्नान कराया जा सकता है। बच्चे के नाखून छोटे रखें और उसे दाने खुजलाने से रोकें। इससे त्वचा में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा कम होता है। पर्याप्त पानी और दूसरे तरल पदार्थ देते रहें।
बुखार में खुद से दवा न दें
चिकनपॉक्स में बच्चे को एस्पिरिन बिल्कुल न दें। चिकनपॉक्स वाले बच्चों में एस्पिरिन देने से रेये सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थिति का खतरा रहता है। बुखार या दर्द के लिए कौन-सी दवा और कितनी मात्रा देनी है, यह बच्चे की उम्र और वजन के अनुसार डॉक्टर से पूछकर तय करें।
इबुप्रोफेन भी बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं देना चाहिए। CDC के अनुसार चिकनपॉक्स में इबुप्रोफेन को गंभीर बैक्टीरियल त्वचा संक्रमण से जोड़ा गया है।
खाने-पीने में क्या दें?
बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ दें। खाना हल्का और आसानी से पचने वाला रखा जा सकता है। बच्चे की पसंद और सहनशीलता के अनुसार खिचड़ी, दाल-चावल, दलिया, दूध-दही, केला, पपीता जैसे सामान्य पौष्टिक खाद्य दिए जा सकते हैं।
अगर मुंह के अंदर भी फफोले या घाव हैं तो बहुत मसालेदार, खट्टे या ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जिनसे मुंह में जलन हो। जबरदस्ती खाना खिलाने के बजाय बच्चे को पर्याप्त तरल देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
किन बच्चों में ज्यादा सावधानी जरूरी?
एक साल से कम उम्र के बच्चे, 12 साल से अधिक उम्र के लोग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में चिकनपॉक्स गंभीर हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से जल्दी संपर्क करना चाहिए।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, तेज या लगातार खांसी, बहुत ज्यादा सुस्ती, भ्रम, चलने में परेशानी, गर्दन अकड़ना, बार-बार उल्टी या तेज पेट दर्द हो तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
इसी तरह अगर बुखार चार दिन से ज्यादा बना रहे, 38.9°C से ऊपर चला जाए या दाने बहुत लाल, गर्म, दर्दनाक होने लगें अथवा उनमें पस निकलने लगे तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। ये त्वचा में बैक्टीरियल संक्रमण या किसी अन्य जटिलता के संकेत हो सकते हैं।
चिकनपॉक्स की वैक्सीन से बचाव संभव
चिकनपॉक्स से बचाव के लिए वरिसेला वैक्सीन उपलब्ध है। WHO के अनुसार चिकनपॉक्स टीकाकरण से रोका जा सकने वाला संक्रमण है। अलग-अलग देशों में इसके टीकाकरण कार्यक्रम और सिफारिशें अलग हो सकती हैं, इसलिए भारत में बच्चे के लिए वैक्सीन की जरूरत और समय डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ से पूछकर तय करना चाहिए।
चिकनपॉक्स को आम बीमारी समझकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ज्यादातर बच्चों में यह ठीक हो जाता है, लेकिन सही देखभाल, संक्रमण से बचाव और समय पर चिकित्सकीय सलाह जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद करते हैं।




















