मुंबई से शुरू होगा प्रस्तावित आंदोलन, चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग; एसआईआर को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने सभी फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दो अक्तूबर से मुंबई से प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को इस प्रस्तावित प्रदर्शन का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रदर्शन में स्वयं मौजूद रहना जरूरी नहीं है। उनका कहना है कि देश में जवाबदेही और चुनाव प्रक्रिया में सुधार की कोशिशों का समर्थन किया जाना चाहिए।
सीजेपी की क्या है तैयारी
सीजेपी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने 25 सितंबर को कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा नहीं देने पर दो अक्तूबर से मुंबई में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही गई है। संगठन ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे समेत एसआईआर पर रोक और आगामी चुनावों को लेकर भी मांगें उठाई हैं।
14 फैसलों पर आपत्ति की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट है। इसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली तथा एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर मतभेद को लेकर सवाल उठे।
आयोग ने कहा- फैसले सर्वसम्मति से हुए
चुनाव आयोग ने इन खबरों के बीच कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय या टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार एसआईआर समेत उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
वांगचुक ने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने वाले आंदोलनों को समर्थन मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अब इस मुद्दे पर कई लोग सामने आ रहे हैं, इसलिए आंदोलन को अपने दम पर आगे बढ़ना चाहिए।





















