भारी बारिश का कहर; कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात
भुवनेश्वर/विशाखापत्तनम। बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव क्षेत्र बुधवार देर रात और गुरुवार तड़के उत्तर आंध्र प्रदेश तथा दक्षिण ओडिशा के तट को पार कर गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक यह सिस्टम कलिंगपट्टनम के पास तट पार करने के बाद पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है।
तट पार करते समय सिस्टम के साथ 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक यह डीप डिप्रेशन की स्थिति में रह सकता है, इसके बाद धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान है।
ओडिशा में भारी बारिश, निचले इलाकों में असर
ओडिशा के दक्षिणी और तटीय हिस्सों में भारी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बने हैं।
मलकानगिरी सहित दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में लगातार बारिश के कारण पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई हैं। इससे कई क्षेत्रों के बीच आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और राहत व्यवस्था बढ़ाई है।
मौसम विभाग ने 24 सितंबर को ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश तथा कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।
आंध्र प्रदेश में 75 किमी प्रति घंटे तक चली हवाएं
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में कलिंगपट्टनम और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। तट पार करने के दौरान हवा के झोंकों की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई।
विजयवाड़ा समेत राज्य के कई हिस्सों में भी बारिश जारी है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है। मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ राज्य के कई जिलों में अगले कुछ घंटों तक बारिश का असर बने रहने की संभावना है।
हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
ओडिशा में मौसम की स्थिति को देखते हुए संवेदनशील और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन ने राहत शिविर और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखा है।
इससे पहले राज्य सरकार ने दक्षिणी और तटीय जिलों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बड़े स्तर पर तैयारी की थी। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे।
बंगाल और कई राज्यों में भी बारिश का असर
डीप डिप्रेशन के कमजोर होते हुए आगे बढ़ने के बावजूद इसका मौसम पर असर कई राज्यों में दिखाई दे सकता है। IMD ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है।
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।
क्या यह चक्रवात अर्नब बना?
बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम को लेकर पहले से “अर्नब” नाम की चर्चा थी। हालांकि IMD के अनुसार यह सिस्टम चक्रवाती तूफान में तब्दील नहीं हुआ और तट को डीप डिप्रेशन के रूप में पार किया। इसलिए मौजूदा स्थिति में इसे आधिकारिक तौर पर चक्रवात कहना सही नहीं होगा।
अब मुख्य चिंता भारी बारिश, जलभराव और स्थानीय बाढ़ की है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक सिस्टम के अगले 24 घंटों में धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है, लेकिन इसके अवशेषों से बारिश का दौर कुछ और समय जारी रह सकता है।





















