फर्जी नियुक्ति पत्र देकर आरोपी फरार
बलरामपुर। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर भाई-बहन से 8.81 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। खुद को डीएम कार्यालय का कर्मचारी बताने वाले एक युवक ने पहले किरायेदार बनकर परिवार का विश्वास जीता और फिर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए। मामला तब उजागर हुआ, जब युवती को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर डीएम कार्यालय में ज्वाइन करने भेजा गया।
नगर कोतवाली में दर्ज एफआईआर के अनुसार, रेहराबाजार क्षेत्र के बनकटवा सराय खास निवासी मनोज कुमार चौहान मार्च 2025 में शहर निवासी शालिनी वर्मा के घर किराये पर रहने आया था। उसने खुद को पहले तहसील तुलसीपुर में कनिष्ठ सहायक और बाद में जिलाधिकारी कार्यालय के राजस्व विभाग में लेखाकार बताया। मोबाइल फोन में कथित नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज दिखाकर उसने परिवार का भरोसा जीत लिया।
आरोप है कि मनोज ने दावा किया कि उसकी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य विकास अधिकारी से सीधी पहचान है और वह सरकारी नौकरी लगवा सकता है। उसने पहले शालिनी के भाई को राजस्व विभाग में अमीन की नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। इस पर परिवार ने बेटी की शादी के लिए रखी एफडी तक तुड़वा दी और अलग-अलग किश्तों में 5.01 लाख रुपये उसे दे दिए।
इसके बाद आरोपी ने शालिनी को डीएम कार्यालय में बाबू की नौकरी दिलाने का झांसा देकर चार लाख रुपये की मांग की। सीट आरक्षित कराने और नियुक्ति प्रक्रिया का हवाला देकर उसने 3.80 लाख रुपये और वसूल लिए।
काफी समय तक टालमटोल करने के बाद आरोपी कथित नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचा और शालिनी को डीएम कार्यालय में ज्वाइन करने भेज दिया। वहां अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई नियुक्ति आदेश जारी ही नहीं हुआ है। इसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
पीड़िता का आरोप है कि रुपये वापस मांगने पर आरोपी किराये का कमरा छोड़कर फरार हो गया। फोन पर संपर्क करने पर उसने जान से मारने की धमकी भी दी।
नगर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस बैंक खातों, ऑनलाइन लेन-देन और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों को भी ठगी का शिकार बनाया है या नहीं।








